टाटा मोटर्स का झटका: 1 जुलाई से महंगे होंगे कमर्शियल और पैसेंजर वाहन, जानें वजह
टाटा मोटर्स का झटका: 1 जुलाई से महंगे होंगे कमर्शियल और पैसेंजर वाहन, जानें वजह
नई दिल्ली: अगर आप टाटा मोटर्स की कोई गाड़ी या कमर्शियल वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। टाटा मोटर्स 1 जुलाई 2026 से अपने सभी कमर्शियल (व्यावसायिक) और पैसेंजर (यात्री) वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी करने जा रही है। अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर यह बढ़ोतरी अलग-अलग होगी।
कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5% तक की वृद्धि
टाटा मोटर्स ने 18 जून को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि कंपनी 1 जुलाई से अपने पूरे कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की दरें बढ़ाने जा रही है।
कितनी होगी बढ़ोतरी: नई दरें 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती हैं।
किन वाहनों पर पड़ेगा असर: यह बढ़ोतरी कंपनी की सभी बसों, पिक-अप ट्रकों, छोटे कमर्शियल वाहनों के साथ-साथ इंटरमीडिएट और हैवी कमर्शियल वाहनों पर लागू होगी।
चालू वित्त वर्ष में दूसरी बढ़ोतरी: वित्त वर्ष 2026-27 में टाटा मोटर्स की तरफ से कमर्शियल वाहनों के दाम में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी कंपनी ने कीमतों में 1.5% तक का इजाफा किया था।
पैसेंजर गाड़ियां भी होंगी 1.5% तक महंगी
कमर्शियल व्हीकल्स के अलावा, टाटा मोटर्स ने कुछ दिन पहले ही अपने पैसेंजर व्हीकल्स पोर्टफोलियो के दाम भी बढ़ाने का ऐलान किया था।
पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 1.5% तक की बढ़ोतरी की जाएगी।
नई कीमतें 1 जुलाई से ही प्रभावी होंगी।
यह बढ़ोतरी कंपनी के पेट्रोल-डीजल (ICE) मॉडल्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) दोनों पर समान रूप से लागू होगी।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (क्या होती है इनपुट कॉस्ट?)
कंपनी के सूत्रों के मुताबिक, कमोडिटी मार्केट (कच्चे माल के बाजार) में बढ़ती कीमतों और इनपुट कॉस्ट के असर को देखते हुए यह फैसला लेना पड़ा है। इसके अलावा महंगाई का बढ़ता दबाव (इन्फ्लेशनरी प्रेशर) भी इसकी एक मुख्य वजह है।
समझें क्या है इनपुट कॉस्ट: किसी भी वाहन को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (जैसे- स्टील, एल्युमीनियम, प्लास्टिक और रबर), फैक्ट्री के खर्चों और मजदूरी को मिलाकर जो कुल लागत आती है, उसे इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब मार्केट में ये चीजें महंगी होती हैं, तो कंपनियां इसका कुछ बोझ ग्राहकों पर डाल देती हैं।
