हरित स्वास्थ्य परिवहन: देश में चलेंगी इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस, केंद्र सरकार देगी 35% तक का अनुदान
हरित स्वास्थ्य परिवहन: देश में चलेंगी इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस, केंद्र सरकार देगी 35% तक का अनुदान
नई दिल्ली: देश में स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में भी विद्युत चालित वाहनों (EVs) को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार ने इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस की खरीद पर उसकी कारखाना-स्तरीय कीमत पर 35 प्रतिशत तक की विशेष वित्तीय सहायता (अनुदान) देने की घोषणा की है। इस पहल से स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण के साथ-साथ प्रदूषण और ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
दो वर्षों में 3,811 इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस का लक्ष्य
सरकार ने स्वास्थ्य परिवहन क्षेत्र में इस बड़े बदलाव के लिए एक निश्चित समयसीमा और बजट तय किया है:
लक्ष्य और समयसीमा: वित्तीय वर्ष 2027 और वित्तीय वर्ष 2028 के दौरान कुल 3,811 विद्युत एम्बुलेंस को सड़कों पर उतारने का लक्ष्य है।
बजट: इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कुल 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
श्रेणियां: इस अनुदान का लाभ रोगी परिवहन वाहन, सामान्य जीवनरक्षक एम्बुलेंस और उन्नत जीवनरक्षक एम्बुलेंस जैसी सभी मुख्य श्रेणियों को मिलेगा।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत मिलेगी सहायता
इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस के लिए घोषित यह वित्तीय सहायता ‘प्रधानमंत्री विद्युत गतिशीलता प्रोत्साहन योजना’ (PM E-DRIVE) के अंतर्गत प्रदान की जाएगी। इस योजना की शुरुआत सितंबर 2024 में लगभग 10,900 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ की गई थी। इस योजना का मुख्य फोकस बसों, मालवाहक वाहनों और एम्बुलेंस जैसे सार्वजनिक व व्यावसायिक वाहनों को इलेक्ट्रिक तकनीक पर स्थानांतरित करना है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद
वर्तमान में देशभर में लगभग 86 हजार पारंपरिक एम्बुलेंस कार्यरत हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रतिवर्ष लगभग 25 हजार नई एम्बुलेंस खरीदी जाती हैं। चूंकि एक एम्बुलेंस की औसत उपयोग अवधि 7 वर्ष होती है, इसलिए सरकार की इस नई नीति से आने वाले वर्षों में रिप्लेसमेंट के तौर पर बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस को बेड़े में शामिल किया जा सकेगा।
लागत में कमी और भारतीय कंपनियों के लिए अवसर
कम परिचालन खर्च: विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक ईंधन (डीजल/पेट्रोल) की तुलना में इलेक्ट्रिक एम्बुलेंस का रखरखाव और परिचालन खर्च काफी कम होता है, जिससे स्वास्थ्य संस्थानों की लागत घटेगी।
ग्लोबल स्टैंडर्ड: विकसित देशों की तर्ज पर भारत में आने वाली ये आधुनिक ई-एम्बुलेंस सिंगल चार्ज में 150 से 320 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होंगी।
स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा: इस नीति से भारतीय वाहन निर्माता कंपनियों को भारी बढ़ावा मिलेगा। कंपनियां अब देश में ही विशेष स्वदेशी विद्युत एम्बुलेंस निर्माण के क्षेत्र में निवेश बढ़ाएंगी, जिससे रोजगार और विनिर्माण दोनों को मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष: केंद्र सरकार की यह पहल देश की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक आधुनिक, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित होगी।
