राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT की जांच पूरी, चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव समेत ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर कस सकता है शिकंजा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT की जांच पूरी, चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव समेत ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर कस सकता है शिकंजा
अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि की कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच पूरी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के छठा दिन पूरा होने के बाद एसआईटी आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप सकती है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
पैसे ही नहीं, सोना-चांदी भी गायब; सीसीटीवी से छेड़छाड़ का शक
SIT की छह दिनों की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
गबन और फर्जीवाड़ा: शुरुआती जांच में केवल नकदी ही नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा चढ़ाया गया सोना-चांदी भी गायब होने की बात सामने आई है। फर्जी ट्रस्ट के नाम से भी गबन किए जाने के सबूत मिले हैं।
सीसीटीवी फुटेज डिलीट: जिस कमरे में चढ़ावे की गिनती होती थी, वहां के सीसीटीवी कैमरों से छेड़छाड़ और फुटेज डिलीट किए जाने का गंभीर शक है। दरअसल, वहां केवल 45 दिनों का बैकअप रखा जाता था। डेटा रिकवरी और फॉरेंसिक जांच के लिए डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) को दिल्ली की लैब भेजा गया है।
लापरवाही और संलिप्तता: एसआईटी ने 6 दिनों में करीब 150 लोगों से पूछताछ की है। इसमें ट्रस्ट के 3 पदाधिकारियों समेत प्रबंधन के 20-25 लोग, एसबीआई (SBI) के 6 और टीसीएस (TCS) के 6 कर्मी शामिल हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी अब तक एसआईटी के सामने पेश नहीं हुए हैं।
’स्पेशल दर्शन’, कच्ची रसीदें और ऑडिट को नजरअंदाज करने का खेल
जांच में मंदिर प्रबंधन की कई बड़ी कमियां और स्तरहीन व्यवस्थाएं उजागर हुई हैं:
कच्ची रसीदें: वीआईपी और वीवीआईपी दर्शन के नाम पर ट्रस्ट के करीबियों को लगाया जाता था। कई भक्त दान में जो सोना, चांदी या नकदी देते थे, उसके बदले उन्हें आधिकारिक रसीद के बजाय कच्ची रसीदें थमा दी जाती थीं।
ऑडिट रिपोर्ट को किया दरकिनार: ट्रस्ट के गठन के बाद जब इंटरनल ऑडिटर ने शुरुआती गड़बड़ियों की रिपोर्ट दी थी, तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। बड़ी ऑडिट फर्म के खर्चों से बचने के लिए कम पैसों पर स्थानीय और करीबी लोगों को चढ़ावा गिनने के काम में लगा दिया गया। यहाँ तक कि एक फ्रेशर को ट्रस्ट का सीए (CA) बना दिया गया था।
टिन्नू यादव और बैंक कर्मियों पर FIR की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, लापरवाही और इस बड़ी साजिश के आरोप में चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, कुछ गणनाकर्मियों और बैंक कर्मियों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जिन पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण यह चोरी हुई, उन्हें ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना तय माना जा रहा है।
SIT शासन को दे सकती है ये अहम सुझाव:
नया ट्रस्ट और कार्यपालक अधिकारी: श्रीराम मंदिर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए और पारदर्शिता के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर एक ‘कार्यपालक अधिकारी’ (CEO) नियुक्त हो।
पदेन सदस्यों को कमान: ट्रस्ट के सरकारी पदेन 3 सदस्यों को चढ़ावे की गिनती की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी जाए।
नियमित ऑडिट: तय समय सीमा के भीतर चढ़ावे का ऑडिट हो और उसकी रिपोर्ट सीधे शासन (सरकार) को भेजी जाए।
पारदर्शी भर्तियां: कर्मचारियों की भर्ती सिफारिशों के आधार पर न होकर पूरी तरह पारदर्शी हो। बैंक भी नोटों की गिनती के लिए संविदा कर्मियों (Contract Workers) की जगह अपने नियमित कर्मचारियों को लगाए।
