शिवसेना में बड़ी टूट की आहट: 6 सांसदों की बगावत रोकने के लिए उद्धव ठाकरे का ‘डैमेज कंट्रोल’ शुरू, बागी क्षेत्रों का करेंगे दौरा
शिवसेना में बड़ी टूट की आहट: 6 सांसदों की बगावत रोकने के लिए उद्धव ठाकरे का ‘डैमेज कंट्रोल’ शुरू, बागी क्षेत्रों का करेंगे दौरा
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के भीतर 6 सांसदों की संभावित बगावत को रोकने और डैमेज कंट्रोल के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच चर्चा है कि ये सभी 6 बागी सांसद आज ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। इस टूट को रोकने के लिए उद्धव ठाकरे खुद जमीन पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं।
’मातोश्री’ पहुंचीं बागी सांसद संजय दीना पाटिल की बेटी
बगावत की खबरों के बीच कयासों का दौर तब और तेज हो गया जब एकनाथ शिंदे गुट में जाने की चर्चाओं में घिरे बागी सांसद संजय दीना पाटिल की बेटी राजुल पाटिल खुद उद्धव ठाकरे से मिलने उनके निवास ‘मातोश्री’ पहुंचीं। इस मुलाकात को ठाकरे गुट की ओर से पाटिल को रोकने की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, बगावती रुख अपना रहे सांसद ओमराजे निंबालकर को मनाने के लिए भी उद्धव गुट के तीन वरिष्ठ नेता उनसे मिलने पहुंचे थे।
27 जून से बागी सांसदों के क्षेत्रों का तूफानी दौरा
संसद में अपनी पार्टी का स्थान बचाने के लिए उद्धव ठाकरे की पहली कोशिश बगावती सांसदों की संख्या को कम करने की है। इसके साथ ही संगठन पर पकड़ मजबूत रखने के लिए उन्होंने खुद बागी सांसदों के संसदीय क्षेत्रों का दौरा करने का फैसला किया है।
दौरे का शेड्यूल: सूत्रों के अनुसार, 27, 28 और 29 जून को उद्धव ठाकरे यवतमाल, परभणी, हिंगोली, धाराशिव और शिरडी का दौरा करेंगे।
रणनीति: इस दौरे के दौरान वह स्थानीय जिला प्रमुखों और पदाधिकारियों के साथ अहम बैठकें करेंगे ताकि सांसदों के जाने के बाद भी जमीनी संगठन में फूट को रोका जा सके।
”चोरों के हाथ में नहीं जाने दूंगा पार्टी”, पद छोड़ने को भी तैयार थे उद्धव
इससे पहले सांसदों को रोकने के लिए भावुक कार्ड खेलते हुए उद्धव ठाकरे ने पक्ष प्रमुख (अध्यक्ष) का पद तक छोड़ने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा था कि अगर कोई और योग्य व्यक्ति शिवसेना प्रमुख बनता है तो उन्हें खुशी होगी, लेकिन वह पार्टी को चोरों के हाथों में नहीं जाने देंगे। इसके साथ ही उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय होने की बात कही जा रही थी। उद्धव ने तंज कसते हुए कहा था कि जब वे 30 साल भाजपा के साथ रहकर उसमें शामिल नहीं हुए, तो कांग्रेस में विलय की बात कहां से आ गई।
मौजूदा स्थिति: उद्धव ठाकरे और उनके सिपहसालार लगातार बगावत की आग को शांत करने में जुटे हैं, लेकिन सबकी नजरें आज बागी सांसदों की होने वाली संभावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जो महाराष्ट्र की सियासत को नया मोड़ दे सकती है।
