ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति समझौता: सामने आए 14 सूत्रीय मसौदे के सभी बिंदु; युद्धविराम से लेकर तेल निर्यात तक पर बनी सहमति
ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति समझौता: सामने आए 14 सूत्रीय मसौदे के सभी बिंदु; युद्धविराम से लेकर तेल निर्यात तक पर बनी सहमति
अंतरराष्ट्रीय डेस्क
तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चले आ रहे कूटनीतिक और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे पर सहमति बन गई है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, दोनों पक्षों ने एक 14 सूत्रीय मसौदा समझौते को स्वीकार किया है, जिसके तहत अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए विस्तृत वार्ता आयोजित की जाएगी।
ईरान के उपविदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि इन वार्ताओं में ईरान पर लगे प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) से जुड़े प्रस्तावों पर भी गंभीर चर्चा होगी।
14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रमुख बिंदु
तस्नीम न्यूज एजेंसी द्वारा साझा किए गए आधिकारिक मसौदे के अनुसार, समझौते की सभी 14 शर्तें निम्नलिखित हैं:
पूर्ण युद्धविराम: ईरान और अमेरिका, अपने-अपने सहयोगियों के साथ मिलकर, इस MoU पर हस्ताक्षर कर लेबनान समेत सभी मोर्चों पर जारी युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने का ऐलान करेंगे।
ताकत के इस्तेमाल पर रोक: दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ दोबारा युद्ध शुरू न करने, धमकी न देने और बल प्रयोग न करने का वादा करेंगे। फाइनल एग्रीमेंट युद्ध से जुड़े सभी नियमों को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।
संप्रभुता का सम्मान: ईरान और अमेरिका एक-दूसरे की संप्रभुता (Sovereignty), क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और किसी भी अंदरूनी मामले में दखल नहीं देंगे।
60 दिनों की समय-सीमा: दोनों पक्ष बातचीत शुरू कर 60 दिनों के भीतर फाइनल एग्रीमेंट पर पहुंचने की कोशिश करेंगे। आपसी सहमति से इस समय-सीमा को बढ़ाया भी जा सकेगा।
अमेरिकी नाकाबंदी और सेना की वापसी: हस्ताक्षर के तुरंत बाद अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शुरू करेगा और अधिकतम 30 दिनों में शिपिंग सामान्य करेगा। अंतिम समझौता होने के 30 दिनों के भीतर अमेरिका फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से अपनी सेना भी हटा लेगा।
होर्मुज स्ट्रेट और कमर्शियल शिपिंग: ईरान फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू करेगा। तकनीकी रुकावटों और बिछाई गई माइंस (Mines) को हटाकर 30 दिनों के अंदर शिपिंग वॉल्यूम को युद्ध से पहले के स्तर पर लाया जाएगा।
$300 बिलियन का पुनर्निर्माण फंड: अमेरिका और उसके क्षेत्रीय भागीदार युद्ध से प्रभावित हुए ईरान के लिए एक पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास कार्यक्रम शुरू करेंगे, जिसमें कम से कम 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹25 लाख करोड़) की फंडिंग शामिल होगी।
प्रतिबंधों की समाप्ति का रोडमैप: अमेरिका आपसी सहमति से तय समय के भीतर ईरान के सभी प्रतिबंध खत्म करने पर सहमत होगा। इस दौरान आर्थिक विकास के साथ-साथ परमाणु मुद्दा चर्चा का दूसरा मुख्य विषय होगा।
परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान फिर से यह निश्चित करेगा कि वह न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। दोनों पक्ष यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के भविष्य, एनरिच्ड न्यूक्लियर मटीरियल के स्टॉक और ईरान की परमाणु ऊर्जा जरूरतों पर सहयोग का फ्रेमवर्क तैयार करेंगे।
यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखना: जब तक अंतिम समझौता नहीं हो जाता, ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम का मौजूदा स्टेटस बनाए रखेगा, जबकि अमेरिका इस क्षेत्र में कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही अपनी सैन्य ताकत बढ़ाएगा।
तेल निर्यात और फ्रीज एसेट्स की रिहाई: अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात के लिए प्रतिबंधों में छूट देगा। वित्तीय लेन-देन, बीमा और परिवहन सेवाओं को तुरंत मंजूरी मिलेगी। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए फंड और संपत्तियों को धीरे-धीरे जारी करेगा, जिसका उपयोग ईरान का केंद्रीय बैंक कर सकेगा।
निगरानी प्रणाली (Verification System): ईरान और अमेरिका मिलकर फाइनल समझौते को जमीनी स्तर पर लागू करने और उसे सत्यापित करने के लिए एक जॉइंट मॉनिटरिंग सिस्टम बनाएंगे।
फाइनल टॉक का आधार: नाकाबंदी हटाने, होर्मुज स्ट्रेट खोलने, तेल निर्यात शुरू होने और फ्रीज एसेट्स की रिहाई की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, दोनों पक्ष केवल बचे हुए शेष मुद्दों पर फोकस करते हुए फाइनल बातचीत आगे बढ़ाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी: इस फाइनल समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के कानूनी तौर पर बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंजूरी दी जाएगी।
विशेष टिप्पणी: इस शुरुआती मसौदे की शर्तों को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है। हालांकि, इजरायल जैसे क्षेत्रीय देशों के रुख और आगामी 60 दिनों की विस्तृत वार्ताओं के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह शांति समझौता मध्य पूर्व में कितना स्थायी साबित होता है।
