“इजरायल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं!” अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर भड़के इजरायली मंत्री इतामार बेन-ग्विर; ट्रंप को दी दोटूक चेतावनी
“इजरायल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं!” अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर भड़के इजरायली मंत्री इतामार बेन-ग्विर; ट्रंप को दी दोटूक चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय डेस्क
यरूशलम/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने जा रहे ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर मध्य पूर्व (Middle East) में घमासान मच गया है। जहाँ एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी प्रशासन इस डील को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं इजरायल ने इस समझौते का पुरज़ोर और कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कैबिनेट के सबसे शक्तिशाली और कट्टरपंथी नेता, इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर (Itamar Ben-Gvir) ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि इजरायल इस समझौते को कतई स्वीकार नहीं करेगा।
’ट्रंप का एग्रीमेंट हमें नहीं बांधता, हम संप्रभु देश हैं’
इतामार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक बेहद कड़ा और लंबा पोस्ट साझा करते हुए अमेरिका के इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा:
”राष्ट्रपति ट्रंप का यह एग्रीमेंट इजरायल को किसी भी तरह से नहीं बांधता है। इजरायल कोई अमेरिका के अंदर बसा हुआ इलाका नहीं है, बल्कि हम एक पूरी तरह से स्वतंत्र और संप्रभु (Sovereign) देश हैं। हमारा पहला और आखिरी कर्तव्य इजरायल के नागरिकों, आईडीएफ (IDF) के सैनिकों और पूरी दुनिया के यहूदी लोगों के प्रति है। हजारों साल के देश निकाला के दौरान जिन यहूदियों पर अत्याचार हुए, उनके प्रति हमारा ऐतिहासिक कर्तव्य है कि हम अपनी पवित्र जमीन पर यहूदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।”
”अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुके, तो खून की कीमत चुकाई”
अमेरिकी नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए बेन-ग्विर ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब भी इजरायल बाहरी दबाव में झुका है, उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
इतिहास का सबक: उन्होंने कहा कि चाहे वो 1993 का ओस्लो समझौता हो, 2006 का लेबनान युद्धविराम हो, या फिर गाजा में बार-बार पीछे हटना हो—जब भी इजरायल अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने कमजोर पड़ा, देश ने अपने लोगों के खून की कीमत ब्याज के साथ चुकाई है।
बनाना रिपब्लिक: उन्होंने साफ शब्दों में लिखा, “हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के शुक्रगुजार हैं। इसके बावजूद, इजरायल कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ (Banana Republic) नहीं है, जिसकी नीतियां और फैसले बाहरी ताकतें तय करेंगी।”
हिज्बुल्लाह को खत्म करने से कम कुछ भी मंजूर नहीं
समझौते में शामिल ‘लेबनान पर हमले रोकने’ की शर्त को खारिज करते हुए इजरायली मंत्री ने साफ किया कि उनकी सेना हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी जंग को बीच में नहीं रोकेगी।
पीछे नहीं हटेंगे: बेन-ग्विर ने कहा, “मैंने प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बंद कमरों में भी हमेशा यही कहा है कि हम इस समझौते के साझेदार नहीं हैं। हमें हिज्बुल्लाह को पूरी तरह खत्म करने से कम किसी भी चीज पर समझौता नहीं करना चाहिए। हमारे वीर लड़ाकों ने जिन इलाकों पर कब्जा किया है और आतंकियों के इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट किया है, हम वहां से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।”
दहिया पर हमले जारी रहेंगे: उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लेबनान की तरफ से इजरायल पर एक भी ड्रोन, यूएवी या मिसाइल दागी गई, तो इजरायली वायुसेना बेरूत के ‘दहिया’ (हिज्बुल्लाह का मजबूत गढ़) को निशाना बनाएगी।
”अब यहूदी मार खाकर चुप रहने वाले नहीं”
अपने बयान के अंत में इजरायली नेता ने वैश्विक शक्तियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि इजरायल के लोग 3,000 साल पुराने हैं और वे अब दुश्मनों के सामने झुकने का इरादा नहीं रखते। उन्होंने कहा, “वे दिन अब हवा हो गए जब यहूदियों पर हमले होते थे और वे चुपचाप मार खाते रहते थे। अब ऐसा कभी नहीं होगा!”
विशेष विश्लेषण: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नाकेबंदी हटाने और शांति की घोषणा के तुरंत बाद इजरायल का यह बागी रुख दिखाता है कि मध्य पूर्व में फिलहाल शांति की राह बेहद कठिन है। यदि इजरायल लेबनान पर हमले जारी रखता है, तो अमेरिका और ईरान का यह ऐतिहासिक समझौता केवल कागजों तक ही सीमित रह सकता है।
