नासिक MLC चुनाव: पूर्ण बहुमत के बाद भी महायुति में ‘उलटफेर’ का डर; पार्षदों की ठाणे में नाकेबंदी, शुरू हुई ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’
नासिक MLC चुनाव: पूर्ण बहुमत के बाद भी महायुति में ‘उलटफेर’ का डर; पार्षदों की ठाणे में नाकेबंदी, शुरू हुई ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’
राजनीतिक डेस्क
मुंबई/नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस चुनाव में दो प्रमुख निर्दलीय उम्मीदवारों— गोकुल गिते और प्रसाद हीरे के अचानक पीछे हटने के बाद तकनीकी रूप से अब केवल सत्तारूढ़ महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे (शिवसेना – शिंदे गुट) ही मैदान में बचे हैं। इसके बावजूद, महायुति गठबंधन किसी भी तरह के उलटफेर, क्रॉस वोटिंग या भीतरघात से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
ठाणे के लग्जरी रिसॉर्ट में शिफ्ट किए गए नगरसेवक
किसी भी तरह के धोखे से बचने के लिए महायुति ने अपने पार्षदों के लिए सख़्त पहरेदारी का इंतजाम किया है। नासिक के करीब 20 से 22 नगरसेवक (पार्षद) ठाणे ज़िला के भिवंडी अंजूर गांव में स्थित एक आलीशान होटल में पहुंच चुके हैं।
गठबंधन के लगभग 150 नगरसेवकों को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग जगहों पर वीआईपी व्यवस्था की गई है। भिवंडी के इस रिसॉर्ट में कमरों का दैनिक किराया 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक है, जहां इन पार्षदों के कम से कम 4 दिनों तक रुकने की संभावना है। शिवसेना नेता और सांसद नरेश म्हस्के के साथ-साथ हाल ही में निर्विरोध चुने गए विधान परिषद सदस्य रवींद्र फाटक ने खुद इस होटल का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वर्तमान में शिवसेना के पार्षद यहाँ पहुंच चुके हैं, जबकि बीजेपी और एनसीपी (अजीत पवार गुट) के पार्षदों के भी जल्द यहाँ पहुँचने की उम्मीद है।
प्रचंड बहुमत के बावजूद महायुति के मन में डर क्यों?
इस चुनाव में कुल 619 मतदाता (जनप्रतिनिधि) हैं, जिनमें से लगभग 450 मतदाताओं के भारी-भरकम संख्याबल के साथ महायुति के पास पहले से ही स्पष्ट और प्रचंड बहुमत है। इसके बाद भी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का सहारा लेने के पीछे कई गंभीर कारण हैं:
आधिकारिक व्हिप का न होना: इस स्थानीय निकाय एमएलसी चुनाव में पार्टियों द्वारा अपने सदस्यों के लिए कोई आधिकारिक व्हिप जारी करने का कानूनी प्रावधान नहीं होता है। सभी मतदाता अपनी मर्जी से गुप्त मतदान करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
बैलेट पेपर पर बागियों के नाम: चूंकि दोनों बागी उम्मीदवारों (गोकुल गिते और प्रसाद हीरे) ने नाम वापसी की आधिकारिक समय-सीमा बीत जाने के बाद पीछे हटने का फैसला किया, इसलिए कानूनी तौर पर मतपत्र (Ballot Paper) पर उनके नाम और चुनाव चिह्न प्रिंट रहेंगे।
समर्थन का अभाव: निर्दलीय गोकुल गिते ने चुनावी प्रचार तो बंद कर दिया है, लेकिन उन्होंने अभी तक महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे को अपना खुला और औपचारिक समर्थन नहीं दिया है। ऐसे में महायुति को डर है कि नाराज पार्षद मतपत्र पर मौजूद बागियों के नाम के आगे अपनी पसंद का नंबर लिखकर खेल बिगाड़ सकते हैं।
जटिल वोटिंग सिस्टम को समझाने के लिए होटल में ‘स्टडी क्लास’
इन सभी जनप्रतिनिधियों को सीधे वोटिंग के दिन यानी 18 जून को नासिक लाया जाएगा। इस बीच होटल के भीतर ही पार्षदों के लिए विशेष वर्कशॉप और स्टडी क्लास आयोजित की जा रही हैं।
शिवसेना नेता विलास शिंदे के मुताबिक, महायुति के कई पार्षद बिल्कुल नए हैं, जिन्हें विधान परिषद की ‘पसंद क्रम’ (Preferential Voting) वाली बेहद जटिल मतदान पद्धति को समझाने की जरूरत है। इस पद्धति में मतदाता को किसी एक व्यक्ति को वोट देने के बजाय सभी उम्मीदवारों को वरीयता के आधार पर रैंक (जैसे 1, 2, 3) देनी होती है। यदि पहली पसंद के वोटों से जीत का कोटा पूरा नहीं होता, तो सबसे कम वोट पाने वाले को रेस से बाहर कर उसके ‘दूसरी पसंद’ के वोटों को अन्य उम्मीदवारों में ट्रांसफर किया जाता है। एक भी गलत अंक या निशान पूरे वोट को अमान्य (Invalid) कर सकता है, इसलिए कोई भी वोट खराब न हो, इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है।
तीन-तीन मंत्रियों ने संभाली कमान, सीएम-डिप्टी सीएम भी देंगे गुरुमंत्र
यह चुनाव महायुति के लिए साख का बड़ा सवाल बन चुका है। शुरुआत में दोनों बागी नेता पीछे हटने को तैयार नहीं थे, जिसके बाद महायुति के तीन वरिष्ठ मंत्रियों— गिरीश महाजन, दादा भुसे और उदय सामंत ने नासिक के कई चक्कर लगाए। मामला मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों (देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार) तक पहुंचने के बाद मान-मनौव्वल के जरिए बागियों को शांत किया गया।
अब ये तीनों प्रमुख मंत्री खुद ठाणे के होटल में डेरा डाले हुए हैं और नगरसेवकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। चर्चा है कि मतदान से ठीक एक दिन पहले यानी 17 जून को मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्री खुद इन सभी मतदाताओं से मिलकर उन्हें चुनाव में एकजुट रहने का विशेष मार्गदर्शन देंगे।
