Monday, June 15, 2026
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एयर इंडिया AI-171 क्रैश: पायलट संगठन का बड़ा दावा, ’14 सेकंड’ के अंतर ने बदली जांच की दिशा; सुसाइड की अटकलें खारिज करने की मांग

एयर इंडिया AI-171 क्रैश: पायलट संगठन का बड़ा दावा, ’14 सेकंड’ के अंतर ने बदली जांच की दिशा; सुसाइड की अटकलें खारिज करने की मांग

​एविएशन एवं नेशनल डेस्क

अहमदाबाद/नई दिल्ली: अहमदाबाद में पिछले साल हुए एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 (AI-171) के दर्दनाक हादसे को तीन दिन पहले ही एक साल पूरा हुआ है। इस बीच, ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स’ (FIP) ने दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को एक पत्र लिखकर शुरुआती जांच रिपोर्ट की तकनीकी जानकारियों को चुनौती दी है। पायलट संगठन का दावा है कि सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट और हाल ही में अमेरिका में किए गए सिम्युलेटर टेस्ट के नतीजों में ’14 सेकंड’ का एक बड़ा अंतर सामने आया है, जो पूरी जांच का रुख बदल सकता है।

​सिम्युलेटर टेस्ट और सरकारी रिपोर्ट में 14 सेकंड का अंतर

​FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी एस रंधावा द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित कानूनी फर्म ‘बीजली एलन’ के वकील डी माइकल एंड्रयूज से एक इनपुट मिला है। इसके मुताबिक, बोइंग-787 विमान पर किए गए सिम्युलेटर परीक्षणों के नतीजे AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट की टाइम-लाइन का समर्थन नहीं करते हैं।

​विवाद का मुख्य कारण विमान का रैम एयर टरबाइन (RAT) सिस्टम है। AAIB की शुरुआती रिपोर्ट कहती है कि ईंधन की आपूर्ति रुकने के केवल 4 से 5 सेकंड बाद RAT ने हाइड्रोलिक पावर देना शुरू कर दिया था। इसके विपरीत, वास्तविक सिम्युलेटर टेस्ट में यह समय करीब 18 सेकंड रिकॉर्ड किया गया। FIP का कहना है कि यदि सिम्युलेटर टेस्ट सही हैं, तो इसका मतलब यह है कि RAT ईंधन आपूर्ति बाधित होने से पहले ही बाहर आ चुका था। ऐसा होना यह साफ संकेत देता है कि विमान में उड़ान भरने से पहले ही कोई गंभीर विद्युत (Electrical) या तकनीकी खराबी मौजूद थी।

​टेकऑफ से पहले ही बाहर आ गया था RAT सिस्टम?

​पायलट संगठन ने कुछ वीडियो और तस्वीरों का हवाला देते हुए दावा किया है कि विमान का RAT सिस्टम टेकऑफ के बाद नहीं, बल्कि रनवे पर दौड़ने के दौरान उड़ान भरने से ठीक पहले ही बाहर निकला हुआ दिखाई दे रहा था।

​इसके अलावा, हादसे से ठीक पहले विमान से कई ACARS मेंटेनेंस संदेश (Technical Messages) भेजे गए थे। विमान दुर्घटना में जीवित बचे यात्रियों ने भी गवाही दी थी कि उन्होंने एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनी थी और केबिन की लाइटें अचानक कम (Dim) हो गई थीं। संगठन ने मांग की है कि इन सभी तथ्यों को एक साथ जोड़कर देखा जाए, ताकि पता चल सके कि क्या कोई इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल्योर इस क्रैश की मुख्य वजह था।

​पायलट संगठन की AAIB से 4 मुख्य मांगें:

​पायलटों की संस्था ने निष्पक्ष जांच के लिए नागरिक विमानन मंत्रालय और AAIB के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

​व्यापक सिम्युलेटर परीक्षण: बोइंग-787 विमान का एक बार फिर व्यापक सिम्युलेटर टेस्ट कराया जाए, जिसमें FIP के एक पर्यवेक्षक (Observer) को भी शामिल किया जाए।

​स्वतंत्र जांच: RAT की तैनाती, हाइड्रोलिक पावर की उपलब्धता और फ्यूल कंट्रोल स्विच की गतिविधियों के बीच के संबंध की एक स्वतंत्र तकनीकी जांच हो।

​सीसीटीवी फुटेज: अहमदाबाद एयरपोर्ट पर लगे सुरक्षा कैमरों के वीडियो फुटेज को निष्पक्ष विश्लेषण के लिए उपलब्ध कराया जाए।

​डेटा विश्लेषण: एयर इंडिया और बोइंग कंपनी से दुर्घटना से ठीक पहले के सभी तकनीकी और मेंटेनेंस संदेशों का पूरा विश्लेषण मांगा जाए।

​’पायलट सुसाइड’ जैसी अटकलों पर लगे रोक

​FIP ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है कि जांच पूरी होने से पहले ही मीडिया में ‘पायलट सुसाइड’ जैसी मनगढ़ंत अटकलें चलाई गईं। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस तरह की बिना सोचे-समझे की गई चर्चाओं से पूरे पायलट समुदाय की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है। इसलिए जब तक अंतिम रिपोर्ट में सभी तकनीकी तथ्यों और सिम्युलेटर टेस्ट को शामिल नहीं कर लिया जाता, तब तक ऐसी अटकलों पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।

​पायलट संगठन ने इस महत्वपूर्ण पत्र की कॉपियां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), डीजीसीए (DGCA), नागरिक विमानन मंत्री और नागरिक विमानन सचिव को भी उचित कार्रवाई के लिए भेज दी हैं।

​क्या था पूरा मामला?

​गौरतलब है कि एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 (AI-171) ने पिछले साल 12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद विमान तकनीकी खराबी का शिकार होकर शहर के एक रिहायशी इलाके में क्रैश हो गया था। इस भीषण और दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 260 लोगों की मौत हो गई थी।

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