खेल

फीफा वर्ल्ड कप 2026: जंग और पाबंदियों के साए में ईरान का मिशन, जानें क्यों आसान नहीं है यह सफर

फीफा वर्ल्ड कप 2026: जंग और पाबंदियों के साए में ईरान का मिशन, जानें क्यों आसान नहीं है यह सफर

​लॉस एंजिलिस, 15- जून 2026 (पीटीआई):

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ग्रुप-चरण का मुकाबला शुरू होने जा रहा है, लेकिन ईरानी फुटबॉल टीम के लिए यह टूर्नामेंट किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध, वीजा की किल्लत, बार-बार बदलते ट्रेनिंग कैंप और कड़े यात्रा प्रतिबंधों के कारण ईरानी टीम अत्यधिक मानसिक और प्रशासनिक दबाव के बीच अपना पहला मैच खेलने के लिए लॉस एंजिलिस पहुंची है।

​ईरान का पहला मुकाबला सोमवार रात को न्यूजीलैंड के खिलाफ होना है। टूर्नामेंट का सह-मेजबान अमेरिका ही है, जिससे टीम के लिए चुनौतियां कई गुना बढ़ गई हैं।

​तनाव और युद्ध के साए में ट्रेनिंग बेस में बदलाव

​28 फरवरी को अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद उपजे युद्ध के हालातों के कारण ईरानी टीम की तैयारियों को तगड़ा झटका लगा है। युद्ध की शुरुआत से पहले ईरान ने अमेरिका के एरिजोना (टक्सन) में ट्रेनिंग की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में टीम को आनन-फानन में मेक्सिको के बाजा कैलिफोर्निया (तिजुआना) शिफ्ट होना पड़ा।

​ईरान ने सुरक्षा कारणों से अपने मैच अमेरिका से बाहर शिफ्ट करने की मांग की थी, जिसे फीफा (FIFA) ने लॉजिस्टिक्स और कॉन्ट्रैक्ट्स का हवाला देकर खारिज कर दिया।

​5 घंटे का थकाऊ सफर और वीजा की दिक्कतें

​ईरान के कप्तान मेहदी टारेमी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि तिजुआना से सोफी स्टेडियम तक की हवाई दूरी बेहद कम होने के बावजूद, तमाम सुरक्षा जांच और प्रक्रियाओं के कारण उन्हें यहाँ पहुँचने में करीब 5 घंटे लग गए। इसके अलावा टीम के साथ अन्य परेशानियां भी जुड़ी हुई हैं:

​सख्त यात्रा नियम: ईरानी टीम को अमेरिका में केवल मैच से ठीक एक दिन पहले आने की अनुमति है और मैच खत्म होते ही उन्हें तुरंत लौटना होगा।

​वीजा रिजेक्शन: टीम के प्रवक्ता के अनुसार, मीडिया रिलेशंस ग्रुप के 2 सदस्यों को अमेरिकी वीजा नहीं मिल सका।

​टिकटों की समस्या: इसके अलावा खिलाड़ियों के परिवारों और प्रशंसकों को मैच टिकट हासिल करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।

​’फुटबॉल का काम राजनीति नहीं, खुशियां बांटना है’

​ईरान के मुख्य कोच अमीर गालेनोई ने माना कि इन राजनीतिक परिस्थितियों का असर खिलाड़ियों के तकनीकी फोकस पर पड़ा है, लेकिन वे टीम का ध्यान रणनीति पर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। गालेनोई ने कहा, “फुटबॉल का काम देशों और संस्कृतियों को करीब लाना और खुशियां बांटना है। ईरानी टीम मुश्किल हालातों से भी रास्ता निकालना जानती है।”

​कप्तान मेहदी टारेमी ने भी स्पष्ट किया कि टीम राजनीति से दूर रहती है और उनका लक्ष्य हर उस ईरानी नागरिक को खुशी देना है जो देश या विदेश में रह रहा है।

​फीफा रैंकिंग में मजबूत स्थिति, लॉस एंजिलिस में ‘होम’ और ‘अवे’ का अनोखा संयोग

​ईरान इस विश्व कप के लिए सबसे पहले क्वालिफाई करने वाली टीमों में से एक है और फिलहाल फीफा रैंकिंग में 20वें स्थान पर काबिज है। लॉस एंजिलिस क्षेत्र को ईरान के मैचों के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि ईरान के बाहर सबसे ज्यादा ईरानी आबादी (लगभग हजारों परिवार) इसी इलाके (तेहरानजेलिस) में रहती है। हालांकि, टीम लीडरशिप यह भी जानती है कि राजनीतिक मतभेदों के कारण स्टेडियम के बाहर और अंदर कुछ विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिल सकते हैं।

​ईरान के आगामी मैचों का शेड्यूल:

​पहला मैच: बनाम न्यूजीलैंड (सोमवार रात, सोफी स्टेडियम)

​दूसरा मैच: बनाम बेल्जियम (अगला रविवार, इंगलवुड)

​तीसरा मैच: बनाम मिस्र (26 जून, सिएटल)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *