उत्तराखंड

उत्तराखंड बनेगा ‘सिनेमन हब’: सेलाकुई में 11-12 जून को अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, ‘महक क्रांति नीति’ से बदलेगी किसानों की तकदीर

उत्तराखंड बनेगा ‘सिनेमन हब’: सेलाकुई में 11-12 जून को अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, ‘महक क्रांति नीति’ से बदलेगी किसानों की तकदीर

​देहरादून: उत्तराखंड को देश का प्रमुख सिनेमन (दालचीनी) उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। देहरादून के सेलाकुई स्थित ‘परफ़्यूमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च & डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट’ (CAP) में 11 और 12 जून को सिनेमन पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार और वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। इस वैश्विक आयोजन में श्रीलंका और इंडोनेशिया समेत कई देशों के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योग प्रतिनिधि और किसान हिस्सा लेंगे।

​सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने इस कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की।

​2 करोड़ से 100 करोड़ तक पहुँचा कारोबार: ‘उत्तराखण्ड महक क्रांति पॉलिसी’ लागू

​कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (CAP) को अब ‘परफ़्यूमरी एंड एरोमैटिक रिसर्च डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट’ के रूप में अपग्रेड कर दिया गया है। पिछले दो दशकों में इस संस्थान के प्रयासों से राज्य के एरोमैटिक सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव आया है:

​कारोबार में भारी उछाल: साल 2003 में जहां इस सेक्टर का टर्नओवर मात्र ₹2 करोड़ था, वहीं साल 2025 तक यह बढ़कर ₹100 करोड़ से अधिक पहुंच चुका है।

​किसानों का जुड़ाव: वर्तमान में राज्य की 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर एरोमैटिक फार्मिंग हो रही है। 109 अरोमा क्लस्टर्स के माध्यम से लगभग 29 हजार किसान इस क्षेत्र से जुड़े हैं।

​महक क्रांति पॉलिसी (2026-36): एरोमैटिक फार्मिंग की सफलता को देखते हुए सरकार ने नई नीति लागू की है। इसके तहत 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों की खेती की जाएगी, जिससे 91 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

​चंपावत और नैनीताल में बनेगी ‘सिनेमन वैली’

​नीति के तहत प्रदेश में 7 एरोमा वैली विकसित की जानी हैं। इसी कड़ी में चंपावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘सिनेमन वैली’ (Cinnamon Valley) विकसित की जा रही है। यह परियोजना राज्य के किसानों, स्टार्टअप्स और एग्री-उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और उत्तराखंड को दालचीनी आधारित उद्योगों के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करेगी।

​अंतरराष्ट्रीय सेमिनार: मुख्य बिंदु और उद्देश्य

​इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य विषय “सिनेमन: इनोवेशन्स इन प्रोपेगेशन, सस्टेनेबल कल्टीवेशन एंड पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजीज” रखा गया है।

​वैश्विक भागीदारी: सेमिनार में श्रीलंका के ‘नेशनल सिनेमन रीसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर’ के विशेषज्ञ, ‘प्योर सिनेमन एक्सपोर्टस’ के निदेशक और इंडोनेशिया के ‘रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्राप्स’ के वैज्ञानिक मुख्य रूप से शामिल हो रहे हैं।

​घरेलू डेलीगेट्स: देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ, 40 डेलीगेट्स और करीब 50 सफल सिनेमन किसान भी इस मंथन का हिस्सा बनेंगे।

​मुख्य फोकस: सेमिनार में दालचीनी की उन्नत खेती, फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स, एक्सपोर्ट रिक्वायरमेंट्स (निर्यात की जरूरतें) और निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा होगी।

​निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान (CAP) का बयान: “यह सेमिनार उत्तराखंड की ‘महक क्रांति पॉलिसी’ को जमीन पर उतारने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी, बल्कि राज्य को सिनेमन प्रॉडक्शन, प्रॉसेसिंग और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में एक नई वैश्विक पहचान मिलेगी।”

​(नोट: प्रेस वार्ता के दौरान कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई व शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं।)

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