होर्मुज के बाद अब ‘मलक्का स्ट्रेट पर टैक्स की सुगबुगाहट: दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते पर गहराया संकट
होर्मुज के बाद अब ‘मलक्का स्ट्रेट पर टैक्स की सुगबुगाहट: दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते पर गहराया संकट
सिंगापुर/जकार्ता: वैश्विक व्यापार जगत में एक नई हलचल पैदा हो गई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ट्रांजिट फीस वसूलने की चर्चाओं के बाद अब दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक व्यापारिक मार्ग मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) पर भी ‘टोल’ लगाने का प्रस्ताव सामने आया है।
इंडोनेशिया की ओर से आए इस शुरुआती विचार ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि दुनिया का लगभग 40% व्यापार इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
क्या है इंडोनेशिया का प्रस्ताव?
इंडोनेशिया के वित्त मंत्रालय ने संकेत दिया है कि जिस तरह स्वेज नहर या पनामा नहर जैसे कृत्रिम रास्तों पर टोल लिया जाता है, उसी तर्ज पर मलक्का जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भी शुल्क लगाया जाना चाहिए।
तर्क: इंडोनेशिया का कहना है कि वे एक रणनीतिक मार्ग पर स्थित हैं, लेकिन यहां से गुजरने वाले हजारों जहाज बिना किसी टैक्स के निकल जाते हैं, जबकि तटीय देशों को इस रूट की सुरक्षा और सफाई पर भारी खर्च करना पड़ता है।
प्रेरणा: इंडोनेशियाई अधिकारियों ने इस विचार के लिए ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में फीस लगाने के हालिया प्रयासों का हवाला दिया है।
मलक्का जलडमरूमध्य का महत्व: आंकड़ों की नजर में
मलक्का जलडमरूमध्य हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है।
व्यापार की लाइफलाइन: दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का करीब 40% और चीन की ऊर्जा आपूर्ति (तेल) का लगभग 80% यहीं से गुजरता है।
ट्रैफिक: हर साल इस रास्ते से 90,000 से अधिक जहाज गुजरते हैं।
आर्थिक प्रभाव: अगर यहाँ टोल लागू होता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन में लागत बढ़ जाएगी, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर कच्चे तेल तक सब कुछ महंगा हो सकता है।
कड़ा विरोध: सिंगापुर और मलेशिया ने जताई आपत्ति
इंडोनेशिया के इस प्रस्ताव का पड़ोसी देशों ने कड़ा विरोध किया है:
सिंगापुर: सिंगापुर के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (UNCLOS) के तहत प्राकृतिक जलडमरूमध्य (Natural Straits) से गुजरने का अधिकार सभी को है और इसके लिए कोई ‘लाइसेंस’ या ‘टोल’ नहीं लिया जा सकता।
मलेशिया: मलेशिया ने भी इसे ‘खतरनाक मिसाल’ बताते हुए स्वतंत्र नौवहन (Freedom of Navigation) के अधिकार को बनाए रखने की बात कही है।
क्या वाकई टोल लग सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक समुद्री रास्तों पर टोल लगाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होगा। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह के कदम से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में एक अराजक स्थिति पैदा हो सकती है।
विशेषज्ञ की राय: > “अगर होर्मुज और मलक्का जैसे रास्तों पर टैक्स वसूलने की होड़ शुरू हुई, तो यह वैश्वीकरण (Globalization) के अंत की शुरुआत हो सकती है। इससे न केवल माल ढुलाई महंगी होगी, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव भी चरम पर पहुंच जाएगा।”
निष्कर्ष: फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है, लेकिन इसने वैश्विक व्यापार की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर टोल की चर्चा ने भारत समेत उन सभी देशों को सतर्क कर दिया है जिनकी अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर टिकी है।
