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विमानों में भी अब ‘ग्रीन फ्यूल’ का दम! एविएशन सेक्टर के लिए भारत सरकार का बड़ा फैसला

विमानों में भी अब ‘ग्रीन फ्यूल’ का दम! एविएशन सेक्टर के लिए भारत सरकार का बड़ा फैसला

सड़क पर दौड़ती गाड़ियों के बाद अब भारत के आसमान में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने विमानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में सिंथेटिक ब्लेंडिंग (Sustainable Aviation Fuel – SAF) को मंजूरी दे दी है। यह कदम न केवल हवाई यात्रा को सस्ता बना सकता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भारत का सबसे बड़ा दांव है।

​क्या है सरकार का ब्लेंडिंग मास्टर प्लान?

​नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप SAF (Sustainable Aviation Fuel) के इस्तेमाल के लिए चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

​2027 तक: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 1% SAF ब्लेंडिंग अनिवार्य होगी।

​2028 तक: इस लक्ष्य को बढ़ाकर 2% कर दिया जाएगा।

​भविष्य का लक्ष्य: धीरे-धीरे इस मात्रा को बढ़ाकर विमानों को पूरी तरह से ‘ग्रीन एनर्जी’ पर शिफ्ट करने की तैयारी है।

​आखिर क्या है यह ‘सिंथेटिक ब्लेंड’?

​सिंथेटिक ब्लेंडिंग या SAF कोई साधारण ईंधन नहीं है। यह गैर-जीवाश्म स्रोतों से तैयार किया जाता है, जैसे:

​इथेनॉल और कृषि अवशेष: गन्ने और मक्के से बना इथेनॉल।

​कुकिंग ऑयल: इस्तेमाल किया हुआ खाद्य तेल (Used Cooking Oil)।

​नगर पालिका कचरा: ठोस कचरे से संसाधित ईंधन।

​ग्रीन हाइड्रोजन: नवीकरणीय ऊर्जा से तैयार किया गया ईंधन।

​हवाई यात्रा पर क्या होगा असर?

​कम होगा कार्बन फुटप्रिंट: विमानन क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े प्रदूषकों में से एक है। SAF का उपयोग उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकता है।

​तेल कंपनियों पर निर्भरता में कमी: वर्तमान में ATF की कीमतें वैश्विक कच्चे तेल के भाव पर निर्भर करती हैं। स्वदेशी इथेनॉल और कचरे से बने ईंधन से कीमतों में स्थिरता आ सकती है।

​इंजन में बदलाव की जरूरत नहीं: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि SAF को वर्तमान विमान इंजनों में बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है।

​भारत बनेगा ग्लोबल हब

​इस मंजूरी के साथ ही भारत ने दुनिया को संदेश दिया है कि वह अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं (Net Zero 2070) को लेकर गंभीर है। इंडियन ऑयल (IOCL) और मंगलौर रिफाइनरी (MRPL) जैसी दिग्गज कंपनियां पहले ही SAF प्लांट लगाने की दिशा में काम शुरू कर चुकी हैं।

​विशेषज्ञों की राय: > “हवाई जहाज में इथेनॉल और सिंथेटिक ईंधन का मिश्रण न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि यह भारत के कृषि क्षेत्र के लिए भी नए रास्ते खोलेगा। अब किसान का उत्पाद आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।”

​निष्कर्ष: तेल संकट और जलवायु परिवर्तन के दोहरे दबाव के बीच, भारत का यह ‘एविएशन मास्टर प्लान’ गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वह दिन दूर नहीं जब भारत की घरेलू उड़ानें पूरी तरह से स्वदेशी कचरे और कृषि उत्पादों से बने ईंधन से उड़ान भरेंगी।

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