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नेपाल में ‘बालेन युग’ की शुरुआत: अब 15 दिन में मिलेगी सैलरी, यूनिवर्सिटी से राजनीतिक यूनियनों का सफाया

नेपाल में ‘बालेन युग’ की शुरुआत: अब 15 दिन में मिलेगी सैलरी, यूनिवर्सिटी से राजनीतिक यूनियनों का सफाया

पड़ोसी देश नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने देश की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए ऐतिहासिक फैसलों की झड़ी लगा दी है। भ्रष्टाचार पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद अब सरकार ने अर्थव्यवस्था में सुधार और शिक्षा के शुद्धिकरण के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं।

​अर्थव्यवस्था को रफ्तार: अब महीने में दो बार वेतन

​नेपाल सरकार ने सदियों पुरानी ‘महीने के अंत में वेतन’ वाली परंपरा को खत्म करते हुए सरकारी कर्मचारियों को हर 15 दिन में वेतन देने का फैसला किया है।

​क्यों लिया गया फैसला: वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य बाजार में नकदी के प्रवाह (Cash Flow) को बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों के पास बार-बार पैसा आने से उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी, जिससे स्थानीय बाजार और व्यापार को मजबूती मिलेगी।

​पड़ोसियों से अलग: दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में अभी भी मासिक वेतन की व्यवस्था है। नेपाल ऐसा करने वाला क्षेत्र का पहला देश बन गया है।

​कैंपस से राजनीति की छुट्टी: छात्र और कर्मचारी संघ भंग

​शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पीएम बालेन शाह ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाते हुए सभी विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में राजनीतिक दलों पर आधारित छात्र और कर्मचारी यूनियनों को भंग करने का निर्देश दिया।

​पढ़ाई पर जोर: प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (VCs) के साथ 3 घंटे की लंबी बैठक के बाद कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

​’जेन जेड’ का समर्थन: चर्चा के दौरान कुलपतियों ने भी स्वीकार किया कि नई पीढ़ी (Gen Z) के छात्र अब दलगत राजनीति के बजाय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और करियर पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे ये यूनियनें अप्रासंगिक हो गई हैं।

​भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: 7 पूर्व प्रधानमंत्रियों की संपत्ति की जांच

​बालेन सरकार केवल प्रशासनिक सुधारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ देश का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है:

​संपत्ति की जांच: सरकार ने एक उच्च स्तरीय न्यायिक पैनल का गठन किया है जो 7 पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों सहित लगभग 100 दिग्गजों की संपत्ति की जांच करेगा।

​इन पर है नजर: जांच के दायरे में शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ जैसे कद्दावर नेताओं के साथ-साथ पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह और पूर्व राष्ट्रपति भी शामिल हैं।

​पारदर्शिता: पीएम बालेन ने स्पष्ट किया है कि 2006 से अब तक सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की आय और संपत्ति का मिलान किया जाएगा और रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा।

​नया नेपाल, नया संकल्प

​बालेन शाह की सरकार ने अपने ‘100-सूत्रीय सुधार एजेंडे’ के जरिए स्पष्ट कर दिया है कि वे नेपाल में ‘सिस्टम’ को बदलने आए हैं। भू-माफियाओं से सरकारी जमीन वापस लेने से लेकर अस्पतालों में गरीबों के लिए 10% बेड मुफ्त करने तक, सरकार के हर फैसले ने पारंपरिक राजनीति करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

​संपादकीय टिप्पणी: नेपाल का यह प्रयोग यदि सफल रहता है, तो यह पूरे दक्षिण एशिया के लिए सुशासन (Governance) का एक नया मॉडल बन सकता है।

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