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परशुराम जयंती 2026: कब है अक्षय तृतीया पर जन्मोत्सव? जानें ‘राम’ से ‘भगवान परशुराम’ बनने की अद्भुत गाथा

परशुराम जयंती 2026: कब है अक्षय तृतीया पर जन्मोत्सव? जानें ‘राम’ से ‘भगवान परशुराम’ बनने की अद्भुत गाथा

​भगवान विष्णु के छठे अवतार और अदम्य साहस के प्रतीक भगवान परशुराम की जयंती हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इसे अक्षय तृतीया के रूप में भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, परशुराम जी चिरंजीवी हैं, यानी वे आज भी पृथ्वी पर सशरीर मौजूद हैं।

​परशुराम जयंती 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

​वर्ष 2026 में परशुराम जयंती 20 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी।

​तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026 को रात से।

​तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026 की शाम तक।

​राम से ‘परशुराम’ बनने की शौर्य गाथा

​भगवान परशुराम का जन्म एक ब्राह्मण कुल में हुआ था, लेकिन उनके गुण और कर्म क्षत्रियों के समान थे। उनके पिता महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका ने उनका नाम ‘राम’ रखा था। उनके परशुराम बनने की कहानी उनके कठोर तप और शस्त्र से जुड़ी है:

​1. भगवान शिव की कठोर तपस्या बालक राम बचपन से ही अत्यंत तेजस्वी और न्यायप्रिय थे। उन्होंने भगवान शिव को अपना गुरु माना और उनकी घोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए।

​2. जब महादेव ने दिया ‘परशु’ भगवान शिव ने राम को एक अत्यंत शक्तिशाली कुल्हाड़ी भेंट की, जिसे ‘परशु’ कहा जाता है। इस दिव्य अस्त्र को धारण करने के कारण ही उनका नाम ‘राम’ से बदलकर ‘परशुराम’ (परशु के साथ राम) हो गया।

​3. अन्याय के विरुद्ध शस्त्र का प्रहार परशुराम ने शस्त्र का प्रयोग कभी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अधर्म के नाश के लिए किया। जब हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन ने अपने अहंकार में आकर महर्षि जमदग्नि का अपमान किया और कामधेनु गाय का बलपूर्वक अपहरण किया, तब परशुराम ने अकेले ही उसका और उसकी आततायी सेना का अंत कर दिया।

​भगवान परशुराम से जुड़ी खास बातें

​शास्त्र और शस्त्र के ज्ञाता: वे जितने बड़े विद्वान थे, उतने ही कुशल योद्धा भी। उनका जीवन संदेश देता है कि ज्ञान के साथ अपनी रक्षा के लिए शक्ति का होना भी अनिवार्य है।

​सात चिरंजीवियों में से एक: माना जाता है कि परशुराम जी अमर हैं और वे कलयुग के अंत में कल्कि अवतार के गुरु की भूमिका निभाएंगे।

​न्याय के देवता: परशुराम जी को ब्राह्मणों का रक्षक और न्याय का देवता माना जाता है।

​महत्वपूर्ण संदेश: परशुराम जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और अपने मूल्यों की रक्षा करने के संकल्प का दिन है।

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