धर्म

​बगलामुखी जयंती 2026: शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला महापर्व, जानें शुभ मुहूर्त और विशेष पूजन विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं हैं, जिन्हें ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है। इनकी साधना शत्रुओं पर विजय और बाधाओं के नाश के लिए अचूक मानी जाती है।

​बगलामुखी जयंती 2026: शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला महापर्व, जानें शुभ मुहूर्त और विशेष पूजन विधि

​नई दिल्ली। इस वर्ष बगलामुखी जयंती 25 अप्रैल 2026 (शनिवार) को मनाई जाएगी। मां बगलामुखी को स्तंभन की देवी माना जाता है, जो अपने भक्तों के शत्रुओं की बुद्धि और वाणी को जड़ कर देती हैं।

​शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)

​पंचांग के अनुसार तिथियों का विवरण इस प्रकार है:

​अष्टमी तिथि प्रारंभ: 24 अप्रैल 2026 को रात 09:32 बजे से।

​अष्टमी तिथि समाप्त: 25 अप्रैल 2026 को रात 11:15 बजे तक।

​निशिता काल (विशेष पूजा का समय): 25 अप्रैल की रात 11:57 बजे से 12:41 बजे (26 अप्रैल) तक।

​पूजन विधि: ऐसे करें मां पीताम्बरा को प्रसन्न

​मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पीताम्बरा साधना भी कहते हैं।

​वस्त्र और आसन: साधक को पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए और पीले आसन पर ही बैठना चाहिए।

​स्थापना: चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां बगलामुखी की तस्वीर या यंत्र स्थापित करें।

​श्रृंगार: माता को पीले फूल (खासकर कनेर), पीला चंदन, हल्दी और पीले फल अर्पित करें।

​भोग: बेसन के लड्डू या केसरिया हलवे का भोग लगाएं।

​दीप दान: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और संभव हो तो हल्दी की माला से मंत्र जाप करें।

​अचूक मंत्र (Powerful Mantras)

​शत्रु बाधा और कानूनी मामलों में सफलता के लिए इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है:

​एकाक्षरी मंत्र: ह्रीं

​ब्रह्मास्त्र माला मंत्र: > “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वाम् कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ओम् स्वाहा।”

​सावधानी और नियम

​ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां बगलामुखी की साधना अत्यंत शक्तिशाली होती है, इसलिए कुछ नियमों का पालन अनिवार्य है:

​पूजा के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।

​साधना को गुप्त रखें, किसी को इसके बारे में न बताएं।

​संभव हो तो किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही मंत्रों का पूर्ण अनुष्ठान करें।

​महत्व: माना जाता है कि इसी दिन मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ था जब एक भयंकर तूफान ने सृष्टि को नष्ट करने की कोशिश की थी। माता ने अपनी शक्ति से उस तूफान को स्तंभित (रोक) कर दिया था।

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