कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत, तेलंगाना हाईकोर्ट ने दी एक हफ्ते की अग्रिम जमानत
कांग्रेस नेता और एआईसीसी मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा को तेलंगाना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने आज (10 अप्रैल 2026) उन्हें एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत (transit anticipatory bail) दे दी है।
मामला क्या है?
पवन खेड़ा ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर आरोप लगाए थे कि उनके पास कई विदेशी पासपोर्ट (UAE, मिस्र, एंटीगुआ और बारबुडा आदि) हैं और विदेशी संपत्तियां हैं, जिन्हें चुनावी हलफनामे में नहीं बताया गया।
इन आरोपों के बाद असम पुलिस (गुवाहाटी क्राइम ब्रांच) ने खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की। आरोपों में फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी आदि शामिल हैं।
असम पुलिस ने खेड़ा की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली में उनके आवास पर छापा मारा और हैदराबाद में भी उनकी तलाश शुरू की।
कोर्ट का फैसला
खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत मांगी (वे अपना पता हैदराबाद बताते हैं, जहां उनकी पत्नी कोटा नीलिमा रहती हैं)।
गुरुवार (9 अप्रैल) को जस्टिस के. सुजाना की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। खेड़ा की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की, जबकि असम सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने तर्क दिए।
कोर्ट ने ट्रांजिट बेल (अंतरिम राहत) देते हुए कहा कि खेड़ा को एक हफ्ते का समय दिया जाता है, जिसमें वे असम की संबंधित अदालत में नियमित अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकते हैं।
कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ यह राहत दी है।
यह राहत पूर्ण अग्रिम जमानत नहीं है, बल्कि ट्रांजिट वाली है — यानी खेड़ा को गिरफ्तारी से एक हफ्ते की सुरक्षा मिली है, ताकि वे असम जाकर वहां की अदालत में याचिका दाखिल कर सकें।
पृष्ठभूमि
यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि असम सरकार आरोपों को गंभीर मानते हुए कार्रवाई कर रही है। खेड़ा ने खुद को “राहुल गांधी का सिपाही” बताते हुए कहा था कि वे डरने वाले नहीं हैं।
अभी तक असम पुलिस की जांच जारी है और खेड़ा को एक हफ्ते में असम की अदालत में जाना होगा। आगे की सुनवाई वहां होगी।
