लोकतंत्र की महाविजय: बंगाल और तमिलनाडु में वोटिंग के टूटे सारे रिकॉर्ड, चुनाव आयोग ने मतदाताओं को किया ‘सलाम’
विधानसभा चुनाव 2026 के पहले बड़े चरण के मतदान ने लोकतांत्रिक इतिहास के पन्ने बदल दिए हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु, दोनों ही राज्यों में जनता ने अपने मताधिकार का ऐसा प्रयोग किया है कि आजादी के बाद के सभी पिछले रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं।
लोकतंत्र की महाविजय: बंगाल और तमिलनाडु में वोटिंग के टूटे सारे रिकॉर्ड, चुनाव आयोग ने मतदाताओं को किया ‘सलाम’
23 अप्रैल 2026 का दिन भारत के चुनावी इतिहास में ‘ऐतिहासिक’ दर्ज हो गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण और तमिलनाडु की सभी सीटों पर हुए मतदान ने वोटिंग प्रतिशत के मामले में अब तक के तमाम कीर्तिमानों को पीछे छोड़ दिया है। जनता के इस भारी उत्साह ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है।
आंकड़ों में रिकॉर्ड तोड़ मतदान (शाम 6 बजे तक)
दोनों राज्यों में मतदान का स्तर अभूतपूर्व रहा:
पश्चिम बंगाल (पहला चरण): राज्य में पहले चरण के तहत शाम छह बजे तक कुल 91.83% मतदान दर्ज किया गया। यह बंगाल के चुनावी इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
तमिलनाडु (सभी सीटें): दक्षिण के इस राज्य में भी मतदाताओं ने जबरदस्त जोश दिखाया और शाम छह बजे तक 84.73% मतदान हुआ।
खास बात: यह आजादी के बाद से इन दोनों राज्यों में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।
मुख्य चुनाव आयुक्त का भावुक संदेश: “मतदाताओं को मेरा सलाम”
चुनावों के इस ऐतिहासिक टर्नआउट पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अपनी गहरी खुशी और आभार व्यक्त किया। उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:
”इन दोनों राज्यों के मतदाताओं को मेरा सलाम है। आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का यह सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) लोकतंत्र के प्रति इस अटूट विश्वास के लिए हर एक मतदाता का अभिनंदन करता है।”
क्यों खास है यह मतदान प्रतिशत?
युवा और बुजुर्गों की भागीदारी: सुबह से ही पोलिंग बूथों पर युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों की लंबी कतारें देखी गईं। दक्षिण में फिल्मी सितारों की अपील और बंगाल में स्थानीय मुद्दों ने जनता को घरों से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई।
शांतिपूर्ण प्रक्रिया: इतने भारी मतदान के बावजूद, चुनाव आयोग के कड़े सुरक्षा इंतजामों के कारण अधिकांश क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया सुचारू और शांतिपूर्ण रही।
बदलाव या स्थायित्व?: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतना भारी मतदान आमतौर पर बड़े बदलाव या फिर किसी लहर का संकेत होता है।
अब नतीजों का इंतज़ार
रिकॉर्ड मतदान के बाद अब सबकी निगाहें 4 मई 2026 पर टिकी हैं, जब ईवीएम खुलेगी और जनता का फैसला दुनिया के सामने आएगा। पश्चिम बंगाल में जहाँ पहले चरण की इस बंपर वोटिंग ने आगामी चरणों के लिए माहौल गर्मा दिया है, वहीं तमिलनाडु की किस्मत आज ईवीएम में कैद हो गई है।
बड़ी बात: भारी मतदान प्रतिशत यह स्पष्ट करता है कि जनता अपनी सरकार चुनने को लेकर कितनी जागरूक और गंभीर है। निर्वाचन आयोग ने इसे भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी जीत बताया है।
