पश्चिम एशिया संकट: भारत ने फिर दोहराया ‘शांति मंत्र’, मध्यस्थता की संभावनाओं पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
पश्चिम एशिया संकट: भारत ने फिर दोहराया ‘शांति मंत्र’, मध्यस्थता की संभावनाओं पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में गहराते संघर्ष के बीच भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर शांति और कूटनीति की वकालत की है। विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के हालिया बयानों ने साफ कर दिया है कि भारत इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए किसी भी सार्थक पहल का समर्थन करने को तैयार है।
’बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नई दिल्ली का हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान केवल ‘बातचीत और कूटनीति’ के जरिए ही निकल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हर उस प्रयास के साथ खड़ा है जो क्षेत्र में स्थिरता और शांति की ओर ले जाता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संकेत: क्या भारत बनेगा मध्यस्थ?
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक महत्वपूर्ण बयान में भारत की संभावित भूमिका की ओर इशारा किया था। जब उनसे शांति बहाली में भारत के योगदान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा:
”भारत ने प्रयास किए हैं, लेकिन हर चीज का एक सही समय होता है। मुमकिन है कि आने वाले समय में भारत इसमें अपनी प्रभावी भूमिका निभाए और सफल भी हो। हम इस संभावना को खारिज नहीं कर सकते।”
राजनाथ सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील की है और वैश्विक कूटनीति में उनका दृष्टिकोण हमेशा ‘संतुलित’ रहा है।
निष्कर्ष
भारत का यह रुख दर्शाता है कि वह केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के संतुलित दृष्टिकोण और दोनों पक्षों से संवाद की क्षमता के कारण, भविष्य में भारत की मध्यस्थता की संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी उम्मीदों के साथ देखा जा रहा है।
