राजनीति

​कुमारगंज में भारी बवाल: BJP उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर हमला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुर्शिदाबाद में हुई झड़पों के बाद अब दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ भाजपा उम्मीदवार पर सरेआम हमला किया गया है।

​कुमारगंज में भारी बवाल: BJP उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर हमला

​पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुमारगंज में चुनावी माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु सरकार पर भीड़ ने हमला बोल दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उम्मीदवार को अपनी जान बचाने के लिए मौके से भागना पड़ा।

​घटना का घटनाक्रम

​हमला और हाथापाई: सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस की मौजूदगी में ही भीड़ शुभेंदु सरकार पर थप्पड़ और मुक्कों से वार कर रही है।

​पुलिस की भूमिका: एक सुरक्षाकर्मी (पुलिस जवान) किसी तरह उम्मीदवार को भीड़ से बचाकर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाता दिखाई दे रहा है।

​संपत्ति का नुकसान: शुभेंदु सरकार का दावा है कि इस हमले में न केवल उन्हें शारीरिक चोटें आई हैं, बल्कि उनकी गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई है।

​विवाद की मुख्य वजह: पोलिंग एजेंटों को हटाना

​भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु सरकार ने इस हमले के पीछे की वजह बताते हुए टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं:

​जबरन बेदखली: शुभेंदु सरकार के अनुसार, कुमारगंज विधानसभा क्षेत्र के 8 से 10 पोलिंग स्टेशनों से उनके पोलिंग एजेंटों को डरा-धमकाकर बाहर निकाल दिया गया था।

​दखल देने पर हमला: जब वे खुद स्थिति का जायजा लेने और अपने एजेंटों को दोबारा बूथ के अंदर बैठाने पहुंचे, तो वहां मौजूद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया।

​चुनाव आयोग का कड़ा रुख

​इस घटना का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग (EC) ने सख्त निर्देश जारी किए हैं:

​त्वरित गिरफ्तारी: आयोग ने वीडियो फुटेज के आधार पर उन सभी लोगों को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया है जो हमले में शामिल थे।

​रिपोर्ट तलब: चुनाव आयोग ने स्थानीय प्रशासन से इस पूरी घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

​निष्कर्ष: बंगाल चुनाव के इस चरण में भी सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद हिंसा और बूथ एजेंटों को हटाने की खबरें लोकतंत्र के उत्सव पर सवालिया निशान लगा रही हैं। कुमारगंज की यह घटना बताती है कि जमीन पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता कितनी हिंसक हो चुकी है।

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