प्राइवेट स्कूलों की ‘मनमानी’ पर NHRC का बड़ा प्रहार: अब महंगी किताबों और भारी बैग से मिलेगी राहत
प्राइवेट स्कूलों की ‘मनमानी’ पर NHRC का बड़ा प्रहार: अब महंगी किताबों और भारी बैग से मिलेगी राहत
नई दिल्ली: देश के लाखों अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल महंगी किताबें खरीदने और भारी-भरकम सिलेबस लादने के दबाव पर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ ‘अकादमिक भेदभाव’ (Academic Discrimination) बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
’नमो फाउंडेशन’ की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
1. महंगी प्राइवेट किताबों से मिलेगी आजादी
अक्सर देखा गया है कि निजी स्कूल कमीशन के चक्कर में प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें अनिवार्य कर देते हैं, जो NCERT की तुलना में 10 गुना तक महंगी होती हैं।
नया निर्देश: आयोग ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 8 तक केवल NCERT/SCERT की किताबें ही पढ़ाई जाएं।
समान पाठ्यक्रम: जब सरकारी स्कूलों में NCERT चलती है, तो प्राइवेट स्कूलों में अलग पाठ्यक्रम पढ़ाना भेदभाव है। शिक्षा के अधिकार (RTE) की धारा 29 के तहत देशभर में पाठ्यक्रम समान होना चाहिए।
2. स्कूल बैग का बोझ होगा कम
भारी बस्ते के बोझ से दबे बचपन को बचाने के लिए आयोग ने ‘नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी 2020’ को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
स्कूलों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे के बैग का वजन निर्धारित मानकों से अधिक न हो।
ज्यादा किताबें थोपने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
3. स्कूलों का होगा ‘बुक्स ऑडिट’
आयोग के निर्देश के बाद अब प्रशासन की ओर से स्कूलों की मनमर्जी पर लगाम लगाने की तैयारी है:
30 दिन में ऑडिट: शिक्षा विभाग के अधिकारी हर स्कूल की ‘बुकलिस्ट’ की जांच करेंगे।
जवाबदेही तय: यदि किसी स्कूल में NCERT के अलावा अन्य पब्लिशर्स की महंगी किताबें मिलीं, तो स्कूल प्रबंधन को इसका ठोस कारण बताना होगा और कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
4. राज्यों से मांगे गए 3 मुख्य जवाब
NHRC ने नोटिस भेजकर राज्यों से निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी मांगी है:
क्या जिला शिक्षा अधिकारियों ने सभी स्कूलों में NCERT किताबें अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है?
यदि आदेश जारी नहीं हुआ, तो अब तक देरी क्यों हुई? तुरंत आदेश जारी कर स्कूलों की सूची अपडेट करें।
सत्र 2025-26 में प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों का डेटा और उनके लिए उपलब्ध कराई गई किताबों का विवरण दें।
आयोग की टिप्पणी: > “शिक्षा का अधिकार (RTE) सभी बच्चों के लिए समान है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाना मानवाधिकारों का उल्लंघन और अकादमिक भेदभाव है। इसे तुरंत रोकना होगा।”
निष्कर्ष: मानवाधिकार आयोग के इस दखल के बाद अब उम्मीद जगी है कि आने वाले सत्र में अभिभावकों को हजारों रुपये की महंगी किताबों से छुटकारा मिलेगा और बच्चों के कंधों से किताबों का बोझ भी कम होगा। शिक्षा मंत्रालय को अब यह जवाब देना होगा कि कक्षा 8 तक का निजी सिलेबस सरकारी मानकों से अलग कैसे चल रहा है।
