दिल्ली मेयर चुनाव: बीजेपी ने घोषित किए उम्मीदवार, AAP ने फिर खींचे कदम; अब निर्विरोध चुना जाना तय
दिल्ली मेयर चुनाव: बीजेपी ने घोषित किए उम्मीदवार, AAP ने फिर खींचे कदम; अब निर्विरोध चुना जाना तय
नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD) के आगामी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस साल भी चुनाव मैदान में न उतरने का चौंकाने वाला फैसला लिया है।
आप (AAP) के इस कदम के बाद अब दिल्ली में बीजेपी का मेयर और डिप्टी मेयर निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।
बीजेपी के उम्मीदवार: कौन संभालेगा कमान?
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पार्टी ने अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया है:
मेयर उम्मीदवार: वार्ड संख्या 53 (रोहिणी-ई) से पार्षद प्रवेश वाही को मेयर पद के लिए मैदान में उतारा गया है।
डिप्टी मेयर उम्मीदवार: वार्ड संख्या 206 (आनंद विहार) से पार्षद मोनिका पंत को डिप्टी मेयर का प्रत्याशी बनाया गया है।
स्थायी समिति (Standing Committee): वार्ड संख्या 27 (बेगमपुर) से पार्षद जय भगवान यादव को स्थायी समिति के सदस्य और नेता सदन के लिए चुना गया है। साथ ही, पहाड़गंज से पार्षद मनीष चड्ढा को भी समिति का सदस्य बनाया गया है।
AAP ने क्यों नहीं उतारा उम्मीदवार?
आम आदमी पार्टी ने लगातार दूसरे साल मेयर चुनाव से दूरी बनाई है। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस निर्णय के पीछे एक खास ‘राजनीतिक रणनीति’ का हवाला दिया है:
भाजपा को ‘एक्सपोज’ करने की रणनीति: भारद्वाज ने कहा कि आप (AAP) भाजपा को दिल्ली में काम करने का एक और मौका दे रही है ताकि जनता देख सके कि केंद्र, एलजी और निगम में सत्ता होने के बावजूद वे फेल हैं।
बहानेबाजी पर रोक: भारद्वाज के मुताबिक, “हम चाहते हैं कि भाजपा के पास काम न करने का कोई बहाना न रहे। जनता अब समझ चुकी है कि शासन चलाना केवल अरविंद केजरीवाल को आता है।”
होर्स ट्रेडिंग का डर: पार्टी के अन्य नेताओं ने दबी जुबान में यह भी स्वीकार किया कि पार्षदों की टूट-फूट और दलबदल की संभावनाओं को देखते हुए चुनाव न लड़ना ही बेहतर विकल्प है।
समीकरण: बीजेपी की राह हुई आसान
एमसीडी के 250 सदस्यों वाले सदन में बहुमत के लिए 126 का आंकड़ा चाहिए।
वर्तमान में बीजेपी के पास 123 पार्षद हैं, जबकि AAP के पास 101 सदस्य बचे हैं।
इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP), कांग्रेस और निर्दलीयों के समर्थन के साथ बीजेपी अब आरामदायक स्थिति में है।
बीजेपी का पलटवार: > “हकीकत यह है कि आम आदमी पार्टी निगम में अपना बहुमत खो चुकी है। आंतरिक कलह और पार्षदों के पार्टी छोड़ने के डर से वे चुनाव से भाग रहे हैं। सौरभ भारद्वाज के बयान केवल अपनी हार को छिपाने की एक हास्यास्पद कोशिश हैं।” — वीरेंद्र सचदेवा, अध्यक्ष, दिल्ली बीजेपी
निष्कर्ष: 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव अब महज एक औपचारिकता रह गए हैं। आप (AAP) के वॉकओवर देने से दिल्ली नगर निगम में अब पूरी तरह से ‘केसरिया’ राज होगा। अब देखना यह है कि क्या अगले एक साल में बीजेपी दिल्ली की जनता की उम्मीदों पर खरा उतर पाती है या आप (AAP) की ‘एक्सपोज’ करने वाली रणनीति सफल होती है।
