बांग्लादेश में खसरे का तांडव: 194 बच्चों की मौत, 28,000 से अधिक संदिग्ध मामले; दशकों में सबसे भीषण प्रकोप
बांग्लादेश में खसरे का तांडव: 194 बच्चों की मौत, 28,000 से अधिक संदिग्ध मामले; दशकों में सबसे भीषण प्रकोप
ढाका: बांग्लादेश इस समय दशकों के सबसे भीषण स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। पिछले महीने शुरू हुए खसरे के प्रकोप ने देश के मासूम बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 194 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 28,000 के पार पहुँच गई है।
हालात और भी गंभीर: प्रतिदिन हो रही हैं मौतें
पिछले एक सप्ताह से स्थिति और भी भयावह हो गई है। हर दिन औसतन 3 से 5 बच्चों की मौत इस बीमारी से हो रही है।
बुधवार: 5 बच्चों की मौत हुई (3 अकेले राजधानी ढाका में)।
गुरुवार: 5 और बच्चों ने दम तोड़ दिया।
सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि यह पिछले कई दशकों में खसरे का सबसे घातक हमला है।
टीकाकरण अभियान और चुनौतियां
स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता जाहिद रायहान ने बताया कि सरकार ने युद्धस्तर पर टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है:
लक्ष्य: 18 मिलियन (1.8 करोड़) बच्चों का टीकाकरण।
वर्तमान स्थिति: लक्ष्य का लगभग 25% (एक चौथाई) हिस्सा ही पूरा हो पाया है।
समय सीमा: टीकाकरण का असर दिखने में अभी कम से कम दो सप्ताह का समय और लग सकता है।
खसरा: एक जानलेवा और संक्रामक बीमारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है।
लक्षण: त्वचा पर लाल चकत्ते, तेज बुखार, खांसी, और सांस लेने में गंभीर तकलीफ।
जटिलताएं: यह बीमारी मस्तिष्क में सूजन और गंभीर श्वसन समस्याओं (Respiratory problems) का कारण बन सकती है, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित होती है।
सियासत और स्वास्थ्य संकट
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस संकट के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा:
विफलता का आरोप: उन्होंने शेख हसीना की पिछली सरकार और कार्यवाहक सरकार पर टीकाकरण अभियान में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
टीकों की कमी: रहमान के अनुसार, जून 2024 में प्रस्तावित टीकाकरण अभियान राजनीतिक अस्थिरता और विद्रोह के कारण स्थगित हो गया था।
मदद: वर्तमान सरकार को संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी (UNICEF) से सहायता मिल रही है, लेकिन देश में अभी भी जांच किटों (Testing Kits) की भारी कमी बनी हुई है।
एक पिता का दर्द
तीन वर्षीय मासूम बेटे को खोने वाले पिता साजिब ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया, “शरीर पर चकत्ते देखते ही हम उसे अस्पताल ले गए, लेकिन पांच दिन बाद हम उसका शव ही वापस ला पाए। उसे बहुत तेज बुखार था और वह सांस नहीं ले पा रहा था।”
निष्कर्ष: बांग्लादेश में यह संकट न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि वहां की राजनीतिक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक टीकाकरण की गति नहीं बढ़ाई जाती, मौतों का सिलसिला रोकना मुश्किल होगा।
