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बिक्री में पिछड़ी टेस्ला: 7 महीनों में बिकीं मात्र 342 कारें, ग्राहकों को रिझाने में नाकाम

बिक्री में पिछड़ी टेस्ला: 7 महीनों में बिकीं मात्र 342 कारें, ग्राहकों को रिझाने में नाकाम

दुनिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के लिए भारतीय बाजार फिलहाल उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रहा है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 7 महीनों में कंपनी भारत में सिर्फ 342 कारें ही बेच पाई है। एलन मस्क की कंपनी के लिए ये आंकड़े काफी निराशाजनक माने जा रहे हैं, क्योंकि भारत को एक बड़े बाजार के रूप में देखा जा रहा था।

कीमत और कॉम्पिटिशन बनी बड़ी चुनौती

जानकारों का मानना है कि टेस्ला की कारों की ऊंची कीमत इसकी कम बिक्री की सबसे बड़ी वजह है। भारत में टेस्ला की कारों की शुरुआती कीमत ही इतनी ज्यादा है कि वे आम ग्राहकों के बजट से बाहर हैं। इसके अलावा, भारत के इलेक्ट्रिक कार बाजार में टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियों का पहले से ही दबदबा है, जो टेस्ला के मुकाबले काफी सस्ती कारें बेच रही हैं।

आगे क्या होगा?

बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर टेस्ला को भारत में टिकना है, तो उसे अपनी कारों की कीमतें कम करनी होंगी। जब तक कंपनी भारत में ही अपनी कारों का निर्माण शुरू नहीं करती, तब तक भारी टैक्स की वजह से कीमतें कम होना मुश्किल है। फिलहाल, भारतीय ग्राहक टेस्ला के ब्रांड नाम के बजाय किफायती और बजट फ्रेंडली इलेक्ट्रिक कारों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।

 

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