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​भारत की पहली पॉड टैक्सी: बिना ड्राइवर के 40 की रफ्तार, जानें सब कुछ

भारत में परिवहन क्रांति की एक नई तस्वीर सामने आ रही है। 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली देश की पहली पॉड टैक्सी जल्द ही सड़कों पर दिखाई देगी। हाल ही में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश के जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी के बीच भी इसी तरह का प्रोजेक्ट पाइपलाइन में है।

​भारत की पहली पॉड टैक्सी: बिना ड्राइवर के 40 की रफ्तार, जानें सब कुछ

​भारत अपने शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए पॉड टैक्सी (Automated Rapid Transit System) को अपनाने जा रहा है। यह पूरी तरह से ड्राइवरलेस (Driverless) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित होगी। हाल ही में मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया है।

​पॉड टैक्सी की मुख्य विशेषताएं

​बिना ड्राइवर का सफर: ये टैक्सियाँ पूरी तरह से ऑटोमेटेड होंगी, यानी इन्हें चलाने के लिए किसी ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी। इन्हें एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से मॉनिटर किया जाएगा।

​रफ्तार और क्षमता: एक पॉड में 6 यात्रियों के बैठने की जगह होगी। इसकी अधिकतम स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।

​प्रदूषण मुक्त: ये पूरी तरह से बिजली (बैटरी) से चलेंगी, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल और शोर-मुक्त परिवहन का माध्यम बनेंगी।

​फ्रिक्वेंसी: यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि हर 15 से 30 सेकंड के अंतराल पर एक पॉड उपलब्ध होगी।

​मुंबई और नोएडा में प्रोजेक्ट की स्थिति

विवरण मुंबई (BKC) प्रोजेक्ट/ नोएडा (जेवर-फिल्म सिटी) प्रोजेक्ट

कुल लंबाई: 8.8 किलोमीटर/ लगभग 14.6 किलोमीटर

स्टेशन: 22 से 38 स्टेशन (विभिन्न चरणों में)/ 12 स्टेशन

मुख्य उद्देश्य: BKC और रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रैफिक कम करना/ जेवर एयरपोर्ट को फिल्म सिटी से जोड़ना

अनुमानित किराया: लगभग ₹21 प्रति किमी/ लगभग ₹10 प्रति किमी

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

​पॉड टैक्सी सड़क के ऊपर बने एक एलिवेटेड ट्रैक (हवा में बने संकरे पुल) पर चलती है। यह ट्रैक मात्र 8 इंच चौड़ा हो सकता है, जो खंभों के सहारे खड़ा किया जाता है। इससे जमीन पर चल रहे ट्रैफिक पर कोई असर नहीं पड़ता। यात्री स्टेशन पर जाकर अपनी मंजिल चुनते हैं और पॉड उन्हें बिना किसी बीच के पड़ाव (Point-to-Point) के वहां छोड़ देती है।

​आम जनता को क्या होगा फायदा?

​ट्रैफिक से आजादी: जाम में फंसे बिना कम समय में गंतव्य तक पहुंचना संभव होगा।

​लास्ट माइल कनेक्टिविटी: मेट्रो स्टेशन या रेलवे स्टेशन से दफ्तर तक जाने के लिए अब ऑटो या टैक्सी का इंतजार नहीं करना होगा।

​सुरक्षा: AI तकनीक और सेंसर के कारण टक्कर या दुर्घटना की संभावना न के बराबर होती है।

​बड़ी बात: मुंबई के प्रोजेक्ट के पहले चरण का काम अगले 10 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रोजेक्ट न केवल भारत को आधुनिक देशों की श्रेणी में खड़ा करेगा, बल्कि यात्रा को भी “फ्यूचरिस्टिक” बना देगा।

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