ब्रह्मांड का 95% हिस्सा ‘गायब’! क्या वाकई हम एक अंधेरे समंदर में जी रहे हैं?
विज्ञान की दुनिया का यह सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला सच है। जिसे हम ‘ब्रह्मांड’ कहते हैं—तारे, ग्रह, गैलेक्सी, और आप-मैं—वह पूरे अस्तित्व का मात्र 5% हिस्सा ही है। बाकी का 95% हिस्सा हमारी आंखों और आधुनिक टेलिस्कोप के लिए भी पूरी तरह ‘अदृश्य’ है।
यहाँ इस रहस्य की पूरी वैज्ञानिक रिपोर्ट दी गई है:
ब्रह्मांड का 95% हिस्सा ‘गायब’! क्या वाकई हम एक अंधेरे समंदर में जी रहे हैं?
खगोल विज्ञान (Astronomy): हम जिसे दुनिया समझते हैं, वह असल में एक विशाल हिमशैल (Iceberg) की नोक भर है। आधुनिक विज्ञान ने पुष्टि की है कि ब्रह्मांड का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसी चीजों से बना है जिन्हें हम देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और न ही आज तक की किसी मशीन से उन्हें सीधे डिटेक्ट कर पाए हैं।
ब्रह्मांड का ‘बंटवारा’ (The Cosmic Breakdown)
खगोलविदों ने ब्रह्मांड को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा है:
* सामान्य पदार्थ (Normal Matter) – 5%:
इसमें वह सब कुछ आता है जिसे हम जानते हैं—एटम, प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन, तारे, पृथ्वी, और सभी जीवित प्राणी। यह हिस्सा प्रकाश को रिफ्लेक्ट करता है, इसलिए हम इसे देख पाते हैं।
* डार्क मैटर (Dark Matter) – करीब 27%:
यह वह ‘अदृश्य गोंद’ है जिसने गैलेक्सीज़ को बांधे रखा है। यह प्रकाश के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करता, इसलिए यह अदृश्य है। हमें इसके होने का पता केवल इसके गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के प्रभाव से चलता है। अगर डार्क मैटर न होता, तो गैलेक्सीज़ के तारे बिखर जाते।
* डार्क एनर्जी (Dark Energy) – करीब 68%:
यह सबसे बड़ा रहस्य है। यह एक ऐसी रहस्यमयी ऊर्जा है जो ब्रह्मांड को बहुत तेजी से फैला रही है। यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत काम करती है और सब कुछ एक-दूसरे से दूर धकेल रही है।
हम ‘अंधे’ क्यों हैं?
इंसानी आंखें और हमारे सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप (जैसे जेम्स वेब) केवल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम (प्रकाश, रेडियो तरंगें, एक्स-रे आदि) को पकड़ सकते हैं।
* डार्क मैटर और डार्क एनर्जी न तो प्रकाश छोड़ते हैं, न सोखते हैं और न ही उसे रिफ्लेक्ट करते हैं।
* यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक अंधेरे कमरे में हवा को नहीं देख सकते, लेकिन उसका दबाव महसूस कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों को कैसे पता चला?
1970 के दशक में वेरा रुबिन नाम की वैज्ञानिक ने देखा कि गैलेक्सी के किनारे वाले तारे भी उतनी ही तेजी से घूम रहे हैं जितने केंद्र वाले। भौतिकी के नियमों के हिसाब से उन्हें धीमा होना चाहिए था। इससे साबित हुआ कि वहां कुछ ‘अदृश्य द्रव्यमान’ (Invisible Mass) है जो उन्हें खींच रहा है। इसी को डार्क मैटर नाम दिया गया।
“हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रह रहे हैं जिसका 95% हिस्सा हमारे लिए किसी पहेली से कम नहीं है। हम केवल 5% की रोशनी में बैठकर बाकी के अंधेरे को समझने की कोशिश कर रहे हैं।”
निष्कर्ष
हाँ, तकनीकी रूप से इंसान इस ब्रह्मांड के प्रति ‘अंधा’ ही है। हम एक ऐसे समंदर के किनारे बैठे हैं जिसकी गहराई और पानी का रंग हमें नहीं पता। डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की खोज ही भविष्य में भौतिक विज्ञान (Physics) के सारे नियम बदल सकती है।
क्या आपको लगता है कि कभी इंसान इस 95% ‘अदृश्य’ रहस्य की गुत्थी सुलझा पाएगा?
