‘राजनीति से संन्यास नहीं, यह मेरा अर्जित अवकाश है…’, हरीश रावत ने चुप्पी तोड़ते हुए युवाओं के लिए कही बड़ी बात
उत्तराखंड के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी हालिया राजनीतिक चुप्पी और कार्यक्रमों से दूरी पर चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने इस ‘राजनीतिक अवकाश’ को अपना स्वाभाविक अधिकार बताया है।
‘राजनीति से संन्यास नहीं, यह मेरा अर्जित अवकाश है…’, हरीश रावत ने चुप्पी तोड़ते हुए युवाओं के लिए कही बड़ी बात
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र बिंदु कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों चर्चाओं में हैं। सभी राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाने के बाद उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए रावत ने स्पष्ट किया है कि 59 वर्षों की निरंतर सेवा के बाद अब वे कुछ समय के लिए ‘अर्जित अवकाश’ (Earned Leave) पर हैं।
59 साल का सफर और ‘अधिकार’ की बात
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि करीब छह दशकों से वे राजनीति के परिणय सूत्र में बंधे हुए हैं और निरंतर कर्तव्यरत रहे हैं। उन्होंने कहा:
“इतने लंबे अंतराल के बाद मैं एक छोटा अर्जित अवकाश लेना अपना स्वाभाविक अधिकार समझता हूं। इस लंबी यात्रा में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जब आप असहज महसूस करते हैं, लेकिन बड़े परिपेक्ष्य में स्थितियों को समझना पड़ता है।”
कुंजवाल के बयान पर मांगी माफी
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल द्वारा रावत के पक्ष में दिए गए बयानों पर उन्होंने कहा कि कुंजवाल जी से उनका मानसिक और भावनात्मक रिश्ता है, इसलिए उनके शब्दों में वह स्वाभाविकता दिखी। हालांकि, रावत ने विनती की कि उनके इस अवकाश को लेकर पक्ष-विपक्ष न बनाया जाए और अनचाही असहजता के लिए उन्होंने माफी भी मांगी।
2027 के युवाओं के लिए ‘दधीचि’ बनने का संकल्प
राजनीति के भविष्य और 2027 के चुनावों को लेकर रावत ने युवाओं को एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने पौराणिक उदाहरण देते हुए कहा:
“जिन नौजवानों को 2027 में अपने लिए संभावनाएं दिख रही हैं, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि महर्षि दधीचि की तरह अगर उन्हें मेरी हड्डियों की जरूरत होगी, तो उनके भविष्य को संवारने के लिए मेरी हड्डियां हमेशा उपलब्ध रहेंगी।”
अवकाश में भी ‘हड्डियां घिस रहे’ हैं रावत
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि भले ही वे सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हैं, लेकिन वे सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि अवकाश के दौरान भी वे लगातार अपनी ‘हड्डियां घिस’ रहे हैं। उन्होंने महसूस किया कि जीवन के इस मोड़ पर उन्हें उन लोगों, समूहों और क्षेत्रों के बीच जाने की जरूरत है, जिनसे उनका दशकों पुराना जुड़ाव रहा है।
पार्टी नेतृत्व ही सर्वोपरि
अपने अनुशासन का परिचय देते हुए रावत ने दोहराया कि वे हमेशा एक समर्पित पार्टी कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी उन्होंने नेतृत्व से विनती जरूर की होगी, लेकिन अंतिम रूप से हाईकमान का निर्णय ही उनके लिए हमेशा ‘शिरोधार्य’ रहा है और यह संकल्प कभी नहीं टूटेगा।
मुख्य बिंदु:
* अवकाश की अवधि: 59 साल के राजनीतिक करियर के बाद लिया छोटा ब्रेक।
* उद्देश्य: जनता के बीच जाकर परामर्श लेना और पुराने रिश्तों को दोहराना।
* संदेश: युवाओं के भविष्य के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की प्रतिबद्धता।
* अपील: समीक्षकों और विरोधियों से इसे राजनीतिक विवाद न बनाने की गुजारिश।
