उत्तराखंड

टिहरी में भालू का तांडव: वन दरोगा समेत तीन को किया लहूलुहान, भारी हंगामे के बाद भालू को ‘शूट’ करने के आदेश

उत्तराखंड के टिहरी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक खूंखार भालू के आतंक और वन विभाग की कथित लापरवाही ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया।

टिहरी में भालू का तांडव: वन दरोगा समेत तीन को किया लहूलुहान, भारी हंगामे के बाद भालू को ‘शूट’ करने के आदेश

उत्तराखंड के टिहरी जिले के थौलधार क्षेत्र में पिछले काफी समय से दहशत का पर्याय बने एक खूंखार भालू ने गुरुवार को जमकर उत्पात मचाया। भालू ने गश्त पर निकली टीम और ग्रामीणों पर जानलेवा हमला कर एक वन दरोगा (फॉरेस्टर) सहित तीन लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने घायलों के साथ कलेक्ट्रेट में धरना दिया।

घात लगाकर किया हमला, जांबाजी से बचाई जान

जानकारी के अनुसार, थौलधार ब्लॉक के सुल्याधार क्षेत्र में वन विभाग की टीम ग्रामीणों के साथ भालू की लोकेशन ट्रेस करने गई थी। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक हमला बोल दिया।

* घायलों के नाम: वन दरोगा अजयपाल पंवार, ग्राम प्रधान (बेरगणी) युद्धवीर सिंह रावत और ग्रामीण विनोद रावत।

* संघर्ष: तीनों घायलों ने काफी देर तक निहत्थे ही भालू का मुकाबला किया, जिससे भालू भागने पर मजबूर हो गया। हालांकि, इस संघर्ष में विनोद रावत के चेहरे पर भालू के नाखूनों के गहरे जख्म आए हैं।

डीएफओ के रवैये पर भड़के ग्रामीण, अस्पताल के बजाय पहुंचे कलेक्ट्रेट

घटना के बाद तब स्थिति और तनावपूर्ण हो गई जब ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डीएफओ (DFO) पुनीत तोमर ने हमले की सूचना मिलने पर मदद भेजने के बजाय ‘हमले के सबूत’ मांग लिए। इससे आक्रोशित ग्रामीण एंबुलेंस लेकर अस्पताल जाने के बजाय सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए।

“हैरानी की बात है कि गश्ती दल को सुरक्षा के लिए केवल लाठी-डंडे दिए गए थे। अगर विभाग ने हथियार दिए होते, तो आज हमारे लोग लहूलुहान न होते।” – आक्रोशित ग्रामीण

प्रशासनिक अधिकारियों ने मांगी माफी, भालू को मारने के आदेश जारी

कलेक्ट्रेट परिसर में पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डीएफओ को हटाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। हंगामे को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. श्याम विजय ने मौके पर ही घायलों का प्राथमिक उपचार किया, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल भेजा गया।

मामला बढ़ता देख मुख्य विकास अधिकारी (CDO) वरूणा अग्रवाल ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया। डीएफओ पुनीत तोमर ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। सीडीओ ने आधिकारिक पुष्टि की है कि उच्च स्तर से इस खूंखार भालू को मारने (Shoot at Sight) के आदेश जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही क्षेत्र में शूटर तैनात किए जाएंगे।

विधायक की चेतावनी: “नहीं मारा गया तो होगा बड़ा आंदोलन”

प्रतापनगर से कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नेगी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रमुख वन संरक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भालू को तुरंत नहीं मारा गया, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।

घटनाक्रम की मुख्य बातें:

* क्षेत्र: थौलधार ब्लॉक, चंबा-धरासू राजमार्ग।

* विवाद की वजह: गश्ती दल के पास आधुनिक हथियारों का न होना और डीएफओ की कथित संवेदनहीनता।

* वर्तमान स्थिति: घायलों का इलाज जारी, भालू को खत्म करने के आदेश लागू।

 

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