बंगाल में ‘मालदा हॉरर’: जब आधी रात को CJI को देने पड़े कड़े आदेश; 7 पन्नों के ऑर्डर में खुला प्रशासन का फेलियर
पश्चिम बंगाल के मालदा (Malda) जिले में जो हुआ, उसने देश की सर्वोच्च अदालत को हिलाकर रख दिया है। यह मामला इतना गंभीर था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को आधी रात को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना पर एक 7 पन्नों का कड़ा आदेश जारी किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के प्रशासन और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गई हैं।
बंगाल में ‘मालदा हॉरर’: जब आधी रात को CJI को देने पड़े कड़े आदेश; 7 पन्नों के ऑर्डर में खुला प्रशासन का फेलियर
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव सुधार (Special Intensive Revision – SIR) के काम में जुटे 7 न्यायिक अधिकारियों (Judges) को भीड़ द्वारा बंधक बनाने की घटना ने न्यायपालिका को झकझोर दिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए इसे “न्यायपालिका को डराने का सुनियोजित प्रयास” करार दिया है।
क्या हुआ था उस ‘खौफनाक’ रात को?
1 अप्रैल 2026 को मालदा के मोथाबारी इलाके में 7 न्यायिक अधिकारी (जिनमें 3 महिला जज भी शामिल थीं) मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम कर रहे थे। तभी एक उग्र भीड़ ने उन्हें घेर लिया।
* 9 घंटे तक बंधक: दोपहर 3:30 बजे से लेकर रात के 12:00 बजे तक इन जजों को एक कमरे में बंद रखा गया।
* बुनियादी सुविधाओं की कमी: कोर्ट के आदेश के अनुसार, एक 5 साल के बच्चे (जो एक महिला जज के साथ था) तक को खाना और पानी नहीं मिलने दिया गया।
* प्रशासन की चुप्पी: हैरानी की बात यह रही कि शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक न तो जिले के कलेक्टर वहां पहुंचे और न ही पर्याप्त पुलिस बल भेजा गया।
CJI का आधी रात का एक्शन
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि उन्हें आधी रात को व्हाट्सएप मैसेज के जरिए इस घटना की जानकारी मिली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए:
* CJI ने आधी रात के बाद पश्चिम बंगाल के होम सेक्रेटरी (गृह सचिव) और अन्य अधिकारियों को मौखिक रूप से ‘कठोर निर्देश’ दिए।
* हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी देर रात अधिकारियों को फोन कर जजों को सुरक्षित निकालने की निगरानी की।
* अंततः रात 12 बजे के बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जजों को वहां से रेस्क्यू किया गया।
7 पन्नों के आदेश की बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने लिखित आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर टिप्पणी की है:
* प्रशासनिक विफलता: कोर्ट ने इसे सिविल और पुलिस प्रशासन की “पूर्ण विफलता” बताया।
* धमकाने की साजिश: कोर्ट ने कहा कि यह कोई ‘अचानक’ हुआ विरोध नहीं था, बल्कि न्यायिक अधिकारियों को डराने और चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की एक “सुनियोजित साजिश” थी।
* कारण बताओ नोटिस: कोर्ट ने बंगाल के मुख्य सचिव (Chief Secretary), DGP, मालदा के DM और SP को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
ताजा अपडेट: केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Central Forces) की तुरंत तैनाती की जाए। कोर्ट ने राज्य पुलिस पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया है।
ममता बनर्जी का बयान: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर दुख जताया है, लेकिन साथ ही आरोप लगाया कि यह बंगाल को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची से नाम काटे जाने को जिम्मेदार ठहराया।
अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को 6 अप्रैल 2026 को वर्चुअली पेश होने का आदेश दिया है।
