गुड फ्राइडे: जब ईसा मसीह ने ‘बलिदान’ से लिखी मानवता की नई परिभाषा
आज गुड फ्राइडे है—ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए यह केवल एक दिन नहीं, बल्कि असीम प्रेम, क्षमा और बलिदान की एक गाथा है। आज ही के दिन प्रभु ईसा मसीह ने मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
गुड फ्राइडे: जब ईसा मसीह ने ‘बलिदान’ से लिखी मानवता की नई परिभाषा
आज दुनिया भर में गुड फ्राइडे मनाया जा रहा है। यह दिन ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) के सूली पर चढ़ाए जाने और उनकी मृत्यु की याद में मनाया जाता है। भले ही यह शोक का दिन है, लेकिन इसे ‘गुड’ (अच्छा) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसाई मान्यताओं के अनुसार, ईसा मसीह ने अपने बलिदान के जरिए लोगों के पापों का प्रायश्चित किया और दुनिया को प्रेम और क्षमा का मार्ग दिखाया।
इतिहास: कलवारी की वो घटना
बाइबिल के अनुसार, आज से लगभग दो हजार साल पहले, यरूशलेम में ईसा मसीह को वहां के धार्मिक कट्टरपंथियों के कहने पर रोमन गवर्नर पोंटियस पिलातुस ने सूली पर चढ़ाने की सजा सुनाई थी। उन्हें कांटों का ताज पहनाया गया और भारी क्रॉस उठाकर ‘कलवारी’ नामक स्थान तक ले जाने को मजबूर किया गया, जहाँ उन्हें कीलों से ठोककर सूली पर लटका दिया गया।
अंतिम शब्द: क्षमा की पराकाष्ठा
सूली पर लटके होने के दौरान भी ईसा मसीह के मन में अपने हत्यारों के प्रति द्वेष नहीं था। उनके अंतिम शब्दों में से एक था:
“हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।”
गुड फ्राइडे की प्रमुख परंपराएं
* मौन और उपवास: आज के दिन चर्चों में कोई उत्सव नहीं होता। लोग उपवास रखते हैं और प्रभु के कष्टों को याद करते हैं।
* दोपहर 3 बजे की प्रार्थना: माना जाता है कि दोपहर 3 बजे ईसा मसीह ने अपने प्राण त्यागे थे, इसलिए इस समय विशेष प्रार्थना सभाएं होती हैं।
* घंटी नहीं बजती: इस दिन चर्च में घंटियाँ नहीं बजाई जातीं, बल्कि लकड़ी के खटखटे का उपयोग किया जाता है।
* काले कपड़े: शोक व्यक्त करने के लिए कई श्रद्धालु काले रंग के वस्त्र धारण करते हैं।
त्याग और पवित्रता का संदेश
गुड फ्राइडे हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए यदि प्राणों की आहुति भी देनी पड़े, तो पीछे नहीं हटना चाहिए। यह दिन हमें दूसरों के प्रति दयावान होने और कड़वाहट को भुलाकर क्षमा करने की शक्ति प्रदान करता है।
ईस्टर का इंतज़ार:
गुड फ्राइडे के ठीक तीसरे दिन यानी आने वाले रविवार को ‘ईस्टर’ मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी दिन ईसा मसीह दोबारा जीवित हो उठे थे, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
