हनुमान जयंती 2026: इन 8 बड़ी सिद्धियों के स्वामी हैं बजरंगबली, जिससे कहलाते हैं ‘अतुलितबलधामम्’
हनुमान जयंती 2026: इन 8 बड़ी सिद्धियों के स्वामी हैं बजरंगबली, जिससे कहलाते हैं ‘अतुलितबलधामम्’
चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार, संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव यानी हनुमान जयंती देश भर में धूमधाम से मनाई जा रही है। हनुमान जी को केवल शारीरिक शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी असीमित आध्यात्मिक शक्तियों के लिए भी ‘महाबली’ कहा जाता है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा में लिखा है— ‘अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।’ माता सीता के वरदान स्वरूप हनुमान जी के पास वो 8 महान सिद्धियां हैं, जो उन्हें ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली योद्धा बनाती हैं।
क्या हैं वे 8 सिद्धियां और क्या है इनका अर्थ?
हनुमान जी की इन सिद्धियों को ‘अष्टसिद्धि’ कहा जाता है, जिनके बल पर उन्होंने रामायण काल में असंभव कार्यों को संभव कर दिखाया था:
* अणिमा: इस सिद्धि के बल पर हनुमान जी अपना शरीर अणु (बेहद छोटा) बना सकते हैं। इसी शक्ति से उन्होंने सुरसा के मुंह में प्रवेश कर चतुराई से बाहर निकल आए थे।
* महिमा: इस शक्ति से हनुमान जी अपने शरीर को असीमित विशाल बना सकते हैं। लंका दहन और समुद्र लांघते समय उन्होंने इसी सिद्धि का उपयोग किया था।
* गरिमा: इस सिद्धि से वे अपने शरीर का भार पहाड़ जैसा भारी कर सकते हैं। महाभारत काल में भीम का अहंकार तोड़ने के लिए हनुमान जी ने अपनी पूंछ इतनी भारी कर दी थी कि भीम उसे हिला तक नहीं पाए थे।
* लघिमा: इस शक्ति से हनुमान जी अपने भार को पंख जैसा हल्का कर सकते हैं, जिससे वे हवा की गति से भी तेज उड़ पाते हैं।
* प्राप्ति: इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को तुरंत प्राप्त कर सकते हैं और पशु-पक्षियों की भाषा समझ सकते हैं।
* प्राकाम्य: इस शक्ति के कारण हनुमान जी पृथ्वी की गहराइयों से लेकर आकाश की ऊंचाइयों तक कहीं भी जा सकते हैं। वे लंबे समय तक पानी के अंदर भी जीवित रह सकते हैं।
* ईशित्व: यह नेतृत्व की शक्ति है। इसके बल पर हनुमान जी ने पूरी वानर सेना का कुशलता से संचालन किया और उनमें दैवीय ऊर्जा का संचार किया।
* वशित्व: इस सिद्धि से वे किसी के भी मन को वश में कर सकते हैं और जितेंद्रिय कहलाते हैं। इसी शक्ति के कारण वे अपनी इंद्रियों और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं।
क्यों कहलाते हैं ‘बजरंगी’?
मान्यता है कि हनुमान जी का शरीर वज्र के समान कठोर है, इसलिए उन्हें ‘वज्रांगी’ कहा जाता था, जो अपभ्रंश होकर ‘बजरंगी’ बन गया। उनकी इन सिद्धियों का संयोजन उन्हें न केवल एक योद्धा बनाता है, बल्कि भक्ति और बुद्धि का भी अप्रतिम केंद्र स्थापित करता है।
विशेष नोट: आज के दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से भक्तों के सभी क्लेश दूर होते हैं और बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
