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शेख हसीना ने मौत की सजा को दी चुनौती: अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल को पत्र भेजकर फैसले को बताया ‘अवैध’

शेख हसीना ने मौत की सजा को दी चुनौती: अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल को पत्र भेजकर फैसले को बताया ‘अवैध’

ढाका/लंदन: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने खिलाफ सुनाए गए मौत की सजा के फैसले के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) को एक औपचारिक पत्र भेजकर इस सजा को “कानूनी रूप से शून्य” (Legally Void) घोषित करने की मांग की है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हसीना अगस्त 2024 से ही भारत में आत्म-निर्वासन (Self-exile) में रह रही हैं।

चुनौती के मुख्य बिंदु: क्यों बताया फैसले को गलत?

लंदन स्थित कानूनी फर्म ‘किंग्सले नैपली’ (Kingsley Napley) के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में शेख हसीना की ओर से कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं:

* अनुपस्थिति में सुनवाई (Trial in Absentia): हसीना के वकीलों का तर्क है कि उन्हें अपनी रक्षा करने का उचित अवसर नहीं दिया गया और उनकी अनुपस्थिति में सुनाई गई सजा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन है।

* क्षेत्राधिकार पर सवाल: पत्र में कहा गया है कि यह ट्रिब्यूनल (ICT) मूल रूप से 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराधों की जांच के लिए बनाया गया था। इसे 2024 के विरोध प्रदर्शनों के मामलों पर सुनवाई करने का कानूनी अधिकार नहीं है।

* निष्पक्ष सुनवाई की मांग: उन्होंने मांग की है कि भविष्य में उनके खिलाफ होने वाली किसी भी कार्यवाही में अंतरराष्ट्रीय निष्पक्ष सुनवाई मानकों का पालन किया जाए, जिसमें सभी सबूतों का खुलासा और उनकी पसंद के कानूनी प्रतिनिधित्व की अनुमति शामिल हो।

क्या था ट्रिब्यूनल का फैसला?

17 नवंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ का दोषी पाया था।

* आरोप: उन पर जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर ड्रोन, हेलीकॉप्टर और घातक हथियारों के इस्तेमाल का आदेश देने का आरोप है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी।

* सजा: ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा और उम्रकैद सुनाई थी।

भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक तनाव

हसीना द्वारा इस सजा को चुनौती देने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण (Extradition) का मुद्दा और जटिल हो गया है।

* बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लगातार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।

* वहीं, अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का मानना है कि ‘राजनीतिक अपराध’ और ‘मृत्युदंड’ की स्थिति में प्रत्यर्पण प्रक्रिया काफी कठिन हो जाती है, क्योंकि भारत में मृत्युदंड वाले मामलों में प्रत्यर्पण को लेकर सख्त नियम हैं।

वर्तमान स्थिति:

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने पहले संकेत दिया था कि वे केवल एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के तहत ही अपील करेंगे, लेकिन अब कानूनी फर्म के जरिए दी गई इस चुनौती को हसीना के बचाव की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए पीड़ितों के लिए न्याय को जरूरी बताया था, लेकिन मौत की सजा पर अपनी असहमति जताई थी।

 

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