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मिडिल ईस्ट संकट पर PM मोदी की हाई-लेवल मीटिंग: तेल, गैस और महंगाई को लेकर बड़े फैसले—पढ़ें मुख्य बातें

मिडिल ईस्ट संकट पर PM मोदी की हाई-लेवल मीटिंग: तेल, गैस और महंगाई को लेकर बड़े फैसले—पढ़ें मुख्य बातें

नई दिल्ली, 1 अप्रैल 2026: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) की एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अस्थिरता के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) पर पड़ने वाले असर की समीक्षा करना था।

प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि आम जनता को इस अंतरराष्ट्रीय संकट की आंच से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।

LPG, PNG और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति पर जोर

बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा रसोई गैस (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की उपलब्धता को लेकर हुई।

* आपूर्ति का विविधीकरण: सरकार ने फैसला किया है कि तेल और गैस के लिए केवल कुछ देशों पर निर्भर रहने के बजाय अब अन्य वैश्विक स्रोतों से भी खरीद की जाएगी ताकि सप्लाई चेन प्रभावित न हो।

* बफर स्टॉक: पीएम ने पेट्रोलियम मंत्रालय को निर्देश दिया है कि कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जाए।

* PNG पर फोकस: जिन इलाकों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां इसे प्राथमिकता देने और सप्लाई को स्थिर रखने पर मंथन हुआ ताकि सिलेंडर की मांग को संतुलित किया जा सके।

फर्टिलाइजर और खेती पर असर की समीक्षा

मिडिल ईस्ट संकट का सीधा असर खाद (Fertilizers) के आयात पर भी पड़ा है।

* पीएम ने यूरिया और DAP की उपलब्धता की समीक्षा की ताकि खरीफ और रबी सीजन के लिए किसानों को कोई किल्लत न हो।

* सरकार ने विदेशी सप्लायर्स के साथ सीधे समन्वय स्थापित करने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है।

महंगाई और कालाबाजारी पर सख्त एक्शन

बैठक में बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए ‘Essential Commodities Act’ (आवश्यक वस्तु अधिनियम) को कड़ाई से लागू करने की बात कही गई।

* कालाबाजारी पर रोक: राज्यों के साथ मिलकर टीम इंडिया के रूप में काम किया जाएगा ताकि जमाखोरी न हो।

* कंट्रोल रूम: आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।

रणनीतिक सुरक्षा और समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz)

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए।

* होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): भारत के तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। इस मार्ग पर बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना की निगरानी बढ़ाने और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा की गई।

* भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में उन्हें निकालने की योजना (Contingency Plan) को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।

PM मोदी का संदेश: “यह एक वैश्विक चुनौती है, लेकिन हमारी प्राथमिकता देश के नागरिकों और किसानों को इस संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखना है। हम अंतरराष्ट्रीय सहयोग और घरेलू तैयारियों के जरिए आपूर्ति को बाधित नहीं होने देंगे।”

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