उत्तराखंड

उत्तराखंड में आज से महंगा हुआ पानी: जल संस्थान ने लागू कीं नई दरें, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

उत्तराखंड में आज से महंगा हुआ पानी: जल संस्थान ने लागू कीं नई दरें, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

देहरादून: उत्तराखंड के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए नए वित्त वर्ष (2026-27) की शुरुआत बढ़े हुए पानी के बिलों के साथ हुई है। उत्तराखंड जल संस्थान ने 1 अप्रैल 2026 से पेयजल की नई दरें प्रभावी कर दी हैं। हालांकि, विभाग ने इसे एक ‘मामूली वृद्धि’ करार दिया है।

1. क्या है बढ़ोतरी का गणित?

जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके गुप्ता के अनुसार, नई दरें साल 2013 के ‘बेस टैरिफ’ पर आधारित हैं। इस बार वार्षिक वृद्धि को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

* लोअर क्लास (भवन मूल्यांकन 0 से 3500 तक): बेस टैरिफ पर 9% की वृद्धि।

* मिडिल और हायर क्लास (3500 से ऊपर मूल्यांकन): बेस टैरिफ पर 11% की वृद्धि।

महत्वपूर्ण नोट: यदि पिछले साल (2025-26) के रेट से तुलना करें, तो यह वास्तविक बढ़ोतरी मात्र 4 से 5 फीसदी के बीच बैठती है।

2. नई दरें: अब कितना आएगा बिल? (उदाहरण)

नगर निगम के न्यूनतम भवन मूल्यांकन (0 से 360) वाले परिवारों के लिए मासिक खर्च में निम्न बदलाव होंगे:

| सेवा का प्रकार | पिछला रेट (2025-26) | नया रेट (2026-27) |

| सरफेस वाटर चार्ज | ₹192.60 | ₹200.70 |

| ग्राउंड वाटर चार्ज | ₹203.30 | ₹211.85 |

| पंपिंग योजना चार्ज | ₹218.28 | ₹227.46 |

3. जनता को राहत, संस्थान पर भारी

मुख्य महाप्रबंधक ने स्पष्ट किया कि 2013 के बाद से नया टैरिफ नहीं आया है, जो जनता के लिए फायदेमंद है। लेकिन विभाग के लिए यह घाटे का सौदा साबित हो रहा है:

* कर्मचारियों का खर्च: वेतन और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि टैरिफ में मामूली बढ़त हो रही है।

* सरकार पर बोझ: कम टैरिफ के कारण जल संस्थान को होने वाले नुकसान की भरपाई अंततः राज्य सरकार को करनी पड़ती है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ता है।

4. सावधान: आधिकारिक वेबसाइट पर जल्द अपडेट

विभाग के अनुसार, नई दरों की विस्तृत सूची जल्द ही जल संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी जाएगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने नए बिलों का भुगतान समय पर करें ताकि किसी भी प्रकार के विलंब शुल्क (Late Fee) से बचा जा सके।

अधिकारी का कथन: “यह वृद्धि बहुत मामूली है और जनता के हितों को ध्यान में रखकर की गई है। हालांकि, संस्थान के सामने बढ़ते खर्चों और कम राजस्व के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।” — डीके गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान।

 

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