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ईरान-इजरायल जंग की आंच भारत के अस्पतालों तक: इलाज होगा महंगा, दवाओं की सप्लाई पर गहराया संकट

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर साफ दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण शिपिंग रूट्स (खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) बाधित होने और एयर कार्गो हब्स (दुबई, दोहा, अबू धाबी) प्रभावित होने से दवाओं, एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs), पैकेजिंग मटेरियल और मेडिकल डिवाइसेस की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

क्या हो रहा है असर:

दवाओं और अस्पताल बिल्स में बढ़ोतरी: फार्मा कंपनियां बताती हैं कि APIs, इंटरमीडिएट्स और पेट्रोकेमिकल आधारित पैकेजिंग की कीमतें बढ़ रही हैं। कुछ दवाओं (जैसे पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की दवाएं) के दाम 10-15% या उससे ज्यादा बढ़ सकते हैं। अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कंज्यूमेबल्स (सिरिंज, इंजेक्शन, ड्रेसिंग आदि) भी महंगे होने की आशंका है।

मेडिकल डिवाइसेस और गैस सप्लाई: पॉलीप्रोपाइलीन जैसी सामग्री की कीमत बढ़ने से सिरिंज की कमी का खतरा मंडरा रहा है। हीलियम और नियोन जैसी मेडिकल गैसों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है, जिससे MRI, CT स्कैन जैसी जांचें महंगी पड़ सकती हैं।

एयर फ्रेट कॉस्ट में भारी उछाल: तापमान नियंत्रित दवाओं (कैंसर ड्रग्स, वैक्सीन, बायोलॉजिक्स) की सप्लाई में देरी हो रही है। एयर कार्गो रेट्स 200-400% तक बढ़ गए हैं। अगर युद्ध लंबा चला तो कुछ अस्पतालों में स्टॉक 4-6 हफ्तों में खत्म होने का खतरा है।

मेडिकल टूरिज्म पर बड़ा झटका: फोर्टिस, आर्टेमिस जैसे बड़े अस्पताल चेन रिपोर्ट कर रहे हैं कि विदेशी मरीजों (खासकर मिडिल ईस्ट से) में 50-75% की कमी आई है, जिससे राजस्व पर असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी:

भारत दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्यातक है, लेकिन कच्चे माल के लिए चीन और यूरोप पर निर्भर है। युद्ध के कारण रूट बदलने से लागत बढ़ रही है, जो अंततः मरीजों पर बोझ बनेगी। फिलहाल बड़े पैमाने पर कमी नहीं है, लेकिन लंबे संघर्ष में स्थिति बिगड़ सकती है।

सरकार और फार्मा इंडस्ट्री वैकल्पिक रूट्स (जैसे इस्तांबुल, ओमान) और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर काम कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने अभी कोई आधिकारिक अलर्ट जारी नहीं किया है, लेकिन अस्पताल प्रशासन लागत बढ़ोतरी को मरीजों पर पास करने की तैयारी में हैं।

सुझाव: आम लोगों को सलाह है कि जरूरी दवाओं का स्टॉक रखें और महंगाई का असर पड़ने पर डॉक्टर से सस्ते विकल्प पूछें। अगर तनाव बढ़ा तो इलाज का खर्च और इंतजार दोनों बढ़ सकता है।

यह युद्ध अब सिर्फ तेल और ऊर्जा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच गया है। स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

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