मिडल ईस्ट संकट: PM मोदी कल मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे ‘वॉार-रूम’ समीक्षा; ईंधन और सप्लाई चेन पर बड़ा मंथन
मिडल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराते युद्ध के बाद भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ होने वाली यह बैठक रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मिडल ईस्ट संकट: PM मोदी कल मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे ‘वॉार-रूम’ समीक्षा; ईंधन और सप्लाई चेन पर बड़ा मंथन
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मूल मंत्र ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ वैश्विक संकट का सामना करना है।
बैठक के मुख्य एजेंडे: तेल, व्यापार और सुरक्षा
मिडल ईस्ट का संकट केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भारत को प्रभावित कर सकता है। बैठक में मुख्य रूप से इन 3 बिंदुओं पर चर्चा होगी:
* ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा: पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की आशंका है। केंद्र और राज्य मिलकर रणनीतियां बनाएंगे ताकि देश में ईंधन की कीमतों और उपलब्धता पर बुरा असर न पड़े।
* सप्लाई चेन और समुद्री मार्ग: लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। जरूरी वस्तुओं की कमी न हो, इसके लिए राज्यों के साथ तालमेल बिठाया जाएगा।
* महंगाई पर नियंत्रण: वैश्विक अस्थिरता का असर घरेलू बाजार पर न पड़े, इसके लिए राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
आचार संहिता का पालन: कुछ CM रहेंगे बैठक से बाहर
जिन राज्यों में वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया चल रही है, वहां के मुख्यमंत्री ‘आदर्श आचार संहिता’ के कारण इस बैठक का हिस्सा नहीं होंगे।
वैकल्पिक व्यवस्था: चुनाव वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व वहां के मुख्य सचिव (Chief Secretaries) करेंगे। उनके लिए कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से एक अलग तकनीकी ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी।
विपक्ष का साथ: सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति
इससे पहले बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच एक दुर्लभ एकजुटता देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार ने विपक्ष के सभी संशयों को दूर कर दिया है।
* होर्मुज स्ट्रेट की चिंता: विपक्षी सदस्यों ने पेट्रोलियम सप्लाई को लेकर चिंता जताई थी, जिस पर सरकार ने बताया कि भारत पहले ही 4 जहाज सुरक्षित लाने में सफल रहा है।
* एकजुट भारत: विपक्ष ने संकट के इस समय में सरकार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है और इस ब्रीफिंग के लिए सरकार का धन्यवाद किया है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह बैठक?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडल ईस्ट से आयात करता है। यदि Crude \ Oil की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत की GDP और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। प्रधानमंत्री का यह कदम ‘प्रो-एक्टिव’ गवर्नेंस का उदाहरण है ताकि संकट आने से पहले ही तैयारियां पुख्ता हों।
