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क्या साथ रहने वाली महिलाओं के पीरियड्स सच में ‘सिंक’ होते हैं? जानें क्या कहता है विज्ञान

यह एक बहुत ही प्रचलित धारणा है कि जब महिलाएँ एक साथ ज्यादा समय बिताती हैं, तो उनके पीरियड्स की तारीखें एक जैसी होने लगती हैं। इसे विज्ञान की भाषा में ‘मैक्क्लिंटॉक प्रभाव’ (McClintock Effect) या ‘मेंस्ट्रुअल सिंक्रोनी’ कहा जाता है।

लेकिन क्या यह वास्तव में सच है? आइए विज्ञान के नजरिए से इसे समझते हैं।

1. मिथक की शुरुआत कहाँ से हुई?

इस धारणा को सबसे पहले 1971 में शोधकर्ता मार्था मैक्क्लिंटॉक ने ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित अपने एक अध्ययन के जरिए हवा दी थी।

* उन्होंने 135 कॉलेज की छात्राओं पर शोध किया जो एक साथ हॉस्टल में रहती थीं।

* उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उनके पीरियड्स की तारीखें फेरोमोन्स (Pheromones – शरीर से निकलने वाले केमिकल संकेत) के कारण आपस में मिलने लगी थीं।

2. आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?

पिछले कुछ दशकों में हुए कई बड़े और सटीक अध्ययनों ने मैक्क्लिंटॉक के दावों को नकार दिया है।

* गणितीय संयोग (Mathematical Chance): वैज्ञानिकों का मानना है कि पीरियड्स का साथ आना महज एक संयोग है। चूंकि हर महिला के साइकिल की लंबाई अलग होती है (21 से 35 दिन), इसलिए समय के साथ दो महिलाओं के पीरियड्स की तारीखें आपस में टकराना सामान्य बात है।

* पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स का डेटा: 2017 में ‘Clue’ (एक प्रसिद्ध पीरियड ट्रैकिंग ऐप) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने 360 जोड़ों (जो साथ रहते थे) के डेटा का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि लंबे समय तक साथ रहने पर पीरियड्स सिंक होने के बजाय अलग-अलग होने की संभावना अधिक थी।

* फेरोमोन्स का अभाव: इंसानों में अभी तक ऐसे किसी पुख्ता ‘फेरोमोन’ का पता नहीं चला है जो दूसरे व्यक्ति के हार्मोनल साइकिल को सीधे तौर पर प्रभावित कर सके।

3. पीरियड्स ‘सिंक’ क्यों महसूस होते हैं?

अगर विज्ञान इसे नहीं मानता, तो हमें ऐसा क्यों लगता है कि हमारे पीरियड्स सिंक हो रहे हैं? इसके कुछ कारण हो सकते हैं:

* ओवरलैपिंग: यदि आपकी साइकिल 28 दिन की है और आपकी दोस्त की 30 दिन की, तो साल में कम से कम एक या दो बार ऐसा जरूर होगा जब आपके पीरियड्स एक ही समय पर होंगे।

* पुष्टि का पूर्वाग्रह (Confirmation Bias): जब हमारे पीरियड्स साथ होते हैं, तो हम उसे याद रखते हैं और चर्चा करते हैं। लेकिन जब वे अलग-अलग होते हैं (जो कि अधिकतर समय होता है), तो हम उस पर ध्यान नहीं देते।

* सामूहिक तनाव या जीवनशैली: यदि साथ रहने वाली महिलाएँ एक जैसा भोजन कर रही हैं, एक जैसा तनाव झेल रही हैं या एक ही तरह की एक्टिविटी कर रही हैं, तो उनके हार्मोनल बदलावों में थोड़ी समानता आ सकती है।

निष्कर्ष

वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर, पीरियड्स का सिंक होना एक मिथक है, न कि कोई जैविक सच्चाई। यह केवल गणितीय संभावनाओं का एक खेल है।

 

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