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बालेंद्र शाह की शपथ में हिंदू रीति-रिवाजों का भव्य संगम: रामनवमी के शुभ मुहूर्त पर राजतिलक, 108 बटुकों का स्वस्ति वाचन

बालेंद्र शाह की शपथ में हिंदू रीति-रिवाजों का भव्य संगम: रामनवमी के शुभ मुहूर्त पर राजतिलक, 108 बटुकों का स्वस्ति वाचन

काठमांडू: नेपाल के युवा नेता बालेंद्र शाह (बालेन) 27 मार्च 2026 को रामनवमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ-साथ बौद्ध परंपराओं का अनोखा मेल देखने को मिलेगा। मुहूर्त को विशेष रूप से चुना गया है – 12:34 बजे दोपहर का शुभ समय।

समारोह की खास बातें:

108 हिंदू बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन और मंगल पाठ

107 बौद्ध लामाओं द्वारा मंगल बाचन

7 ब्राह्मण पंडितों द्वारा शंखनाद

राजतिलक और अन्य पारंपरिक हिंदू अनुष्ठान

यह तारीख और रीति-रिवाजों का चुनाव सिर्फ शुभ मुहूर्त से ज्यादा प्रतीकात्मक माना जा रहा है। बालेंद्र शाह ने अपना चुनावी अभियान जनकपुर (सीता जी की जन्मभूमि) से शुरू किया था। रामनवमी (भगवान राम के जन्मदिन) पर शपथ लेना रामायण की परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है।

अयोध्या से क्या कनेक्शन?

राजतिलक और रामनवमी मुहूर्त का चयन अयोध्या की राम मंदिर परंपराओं से प्रेरित माना जा रहा है। नेपाल हिंदू-बहुल देश है और राम-सीता की पूजा यहां गहरी आस्था का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम युवा नेता द्वारा हिंदू सांस्कृतिक पहचान को मजबूती से अपनाने का संदेश देता है, बिना किसी राजतंत्रिक पदानुक्रम के।

समारोह राष्ट्रपति भवन में होगा और काफी हद तक पारंपरिक प्रोटोकॉल का पालन करेगा। BIMSTEC देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन बड़े विदेशी मेहमानों की सूची अभी सीमित है।

राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के वरिष्ठ नेता बालेंद्र शाह (35 वर्ष) हाल के चुनाव में भारी जीत के बाद प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उनकी पार्टी ने नेपाल की राजनीति में युवा और बदलाव का नारा देते हुए लैंडस्लाइड वोट हासिल किया।

यह समारोह नेपाल की सांस्कृतिक सद्भाव का भी प्रतीक है – जहां हिंदू और बौद्ध परंपराएं एक साथ फल-फूल रही हैं।

दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया:

RSP नेता: “यह सिर्फ शपथ नहीं, सांस्कृतिक पुनरुत्थान का संदेश है।”

राजनीतिक विश्लेषक: “रामनवमी पर शपथ से हिंदू वोट बैंक और सांस्कृतिक गौरव दोनों मजबूत होंगे।”

27 मार्च को नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा – युवा ऊर्जा, सांस्कृतिक गौरव और हिंदू-बौद्ध एकता के साथ।

(स्रोत: नेपाल मीडिया रिपोर्ट्स, RSP आधिकारिक बयान और हालिया समाचार)

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