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सोना, चांदी और कैश… श्री जगन्नाथ मंदिर का रहस्यमयी रत्न भंडार 48 साल बाद खुला, गिनती शुरू; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

सोना, चांदी और कैश… श्री जगन्नाथ मंदिर का रहस्यमयी रत्न भंडार 48 साल बाद खुला, गिनती शुरू; सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पुरी (ओडिशा): भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के पवित्र धाम में एक ऐतिहासिक क्षण! श्री जगन्नाथ मंदिर का प्रसिद्ध रत्न भंडार (Ratna Bhandar) आज 25 मार्च 2026 को 48 साल बाद खोला गया। दोपहर करीब 12:12 बजे से 1:45 बजे के शुभ मुहूर्त में शुरू हुई यह प्रक्रिया भक्तों और देशभर में चर्चा का विषय बन गई है।

रत्न भंडार में सोने-चांदी के आभूषण, कीमती रत्न, नग और नकदी रखी गई है। 1978 में हुई आखिरी गिनती के अनुसार यहां लगभग 149 किलो सोना और 184-221 किलो चांदी के आभूषण थे (कुल 454 प्रकार के सोने और 293 प्रकार के चांदी के आभूषण)। कुछ अनुमानों में कुल सोना 215 किलो और चांदी 352 किलो तक बताया गया है। अब नई गिनती में इनकी सही संख्या, वजन और स्थिति दर्ज की जाएगी।

क्या हो रही है प्रक्रिया?

RBI के दो वरिष्ठ अधिकारी, जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ), रजिस्टर्ड सुनार और मंदिर प्रशासन की टीम मौजूद है।

वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3D मैपिंग का इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

गिनती की प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है। पहले बाहरी (बहारा) भंडार की गिनती होगी, फिर अंदरूनी (भितरा) भंडार की।

मंदिर के दर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भक्त बाहर से बैरिकेडिंग के पीछे से देख सकेंगे।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

भारी पुलिस बल, CRPF और खुफिया एजेंसियां तैनात।

पूरे परिसर को सीसीटीवी से कवर किया गया।

कोई भी मूल्यांकन नहीं, सिर्फ इन्वेंट्री (सूचीकरण) का काम होगा।

ओडिशा सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने इस ऐतिहासिक कार्य के लिए SOP (मानक प्रक्रिया) जारी की थी। चैत्र नवरात्रि के दौरान शुरू हुई यह प्रक्रिया आस्था और पारदर्शिता दोनों का प्रतीक मानी जा रही है।

मंदिर प्रशासन ने कहा कि यह काम भगवान जगन्नाथ की इच्छा से हो रहा है और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी। गिनती पूरी होने के बाद नई सूची तैयार की जाएगी और भविष्य के संरक्षण के लिए डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा।

यह घटना पुरी के लाखों भक्तों के लिए भावुक पल है। जगन्नाथ मंदिर की आस्था में रत्न भंडार हमेशा से रहस्य और भक्ति का केंद्र रहा है। अब 48 साल बाद उस रहस्य से पर्दा उठने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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