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भारत का ‘देसी S-400’ तैयारियों में: प्रोजेक्ट कुशा का पहला डेवलपमेंट ट्रायल सफल, 400 किमी तक दुश्मन को रोकेगा

भारत का ‘देसी S-400’ तैयारियों में: प्रोजेक्ट कुशा का पहला डेवलपमेंट ट्रायल सफल, 400 किमी तक दुश्मन को रोकेगा

नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारत के सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस प्रोग्राम प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha) के पहले डेवलपमेंट ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। यह सिस्टम रूस के S-400 Triumf जैसी क्षमता वाला माना जा रहा है और चीन-पाकिस्तान जैसे खतरों के खिलाफ मल्टी-लेयर्ड मिसाइल शील्ड बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

DRDO और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के सहयोग से विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट तीन प्रकार के इंटरसेप्टर मिसाइलों (M1, M2, M3) पर आधारित होगा, जिनकी मारक क्षमता 60 किमी से लेकर 350-400 किमी तक होगी। M1 वैरिएंट (लगभग 150 किमी रेंज) का पहला विकासात्मक ट्रायल हाल ही में पूरा हुआ, जिसमें डुअल-पल्स रॉकेट मोटर और अन्य सब-सिस्टम्स की ग्राउंड वैलिडेशन सफल रही।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी शुरुआती ट्रायल्स में “कुछ सफलता” की पुष्टि की थी। अब 2026 में फ्लाइट ट्रायल्स शुरू होने की उम्मीद है। पूरा सिस्टम 2028-29 तक विकसित हो जाने और 2030 के आसपास भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने की योजना है।

कुशा vs S-400: तुलना में क्या खास?

रेंज: S-400 की तरह 400 किमी तक लक्ष्य भेदने की क्षमता

क्षमताएं: एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल, ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलों और प्रिसीजन गाइडेड मुनिशन को नष्ट कर सकता है

फायदा: पूरी तरह स्वदेशी, ओपन आर्किटेक्चर – अकाश, MRSAM और S-400 के साथ आसानी से इंटीग्रेट होगा

लागत: लगभग 5 स्क्वाड्रन के लिए ₹21,000-40,000 करोड़ का अनुमान

यह प्रोजेक्ट मिशन सुंदरशन चक्र का हिस्सा है, जिसके तहत भारत अपनी हवाई सुरक्षा को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। S-400 की कुछ रेजिमेंट्स पहले से भारतीय वायुसेना में तैनात हैं, लेकिन कुशा आने के बाद आयात पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।

DRDO अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल में सभी मिशन ऑब्जेक्टिव्स पूरे हुए। अगले चरण में यूजर ट्रायल्स (IAF के साथ) होंगे।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है: प्रोजेक्ट कुशा की सफलता भारत को सामरिक स्वायत्तता देगी और पड़ोसी देशों की बढ़ती हवाई क्षमताओं के मुकाबले में मजबूत ढाल बनेगी।

(स्रोत: DRDO अपडेट्स, रक्षा मंत्रालय और हालिया रिपोर्ट्स)

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