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‘कानून जाल है, जब चाहो फंसा दो’ – अग्रिम जमानत मिलने के बाद बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

‘कानून जाल है, जब चाहो फंसा दो’ – अग्रिम जमानत मिलने के बाद बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज/वाराणसी: इलाहाबाद हाईकोर्ट से पॉक्सो एक्ट और यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत मिलने के तुरंत बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा, “कानून जाल है, जब चाहो फंसा दो।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी पर प्रयागराज के झूंसी थाने में दो नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप लगा था। FIR में पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। दोनों ने आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताते हुए अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।

आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश भी दिया।

जमानत मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह केस फर्जी है और कुछ तत्व शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून को जाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने कोर्ट में बयान दर्ज कराया था और मेडिकल रिपोर्ट में भी आरोपों की कुछ पुष्टि बताई गई थी, लेकिन स्वामी पक्ष ने पूरे मामले को षड्यंत्र करार दिया है।

यह मामला पिछले कुछ हफ्तों से सुर्खियों में है। हाईकोर्ट ने पहले गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी और अब पूर्ण अग्रिम जमानत दे दी है।

क्या कहते हैं दोनों पक्ष?

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: “मुकदमा झूठा है। बटुक कभी आश्रम में नहीं रहे। यह हिंदू संतों को बदनाम करने की साजिश है।”

शिकायतकर्ता पक्ष: “पीड़ित बच्चों को न्याय मिलना चाहिए। हम कोर्ट पर भरोसा करते हैं।”

अब मामले की जांच आगे बढ़ेगी। स्वामी को जांच में सहयोग करना होगा, जबकि कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार रहेगा।

(स्रोत: इलाहाबाद हाईकोर्ट आदेश और समाचार एजेंसियां)

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