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डिजिटल अरेस्ट पर सरकार की सख्ती! WhatsApp को डिवाइस ID ब्लॉक करने का आदेश – स्कैमर्स की अब आएगी मुश्किल

डिजिटल अरेस्ट पर सरकार की सख्ती! WhatsApp को डिवाइस ID ब्लॉक करने का आदेश – स्कैमर्स की अब आएगी मुश्किल

देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी (IDC) ने WhatsApp को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह उन डिवाइस आईडी (Device IDs) को ब्लॉक करे, जिनका इस्तेमाल ठग डिजिटल अरेस्ट स्कैम में कर रहे हैं।

यह आदेश आज (21 मार्च 2026) की प्रमुख खबरों में छाया हुआ है (स्रोत: AajTak, Indian Express, News18, Inc42 आदि)। सरकार का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि स्कैमर्स एक अकाउंट ब्लॉक होने पर नया अकाउंट बनाकर फिर से ठगी न शुरू कर सकें – क्योंकि अब पूरा फोन (डिवाइस) ही WhatsApp पर ब्लॉक हो जाएगा।

क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?

ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या RBI अधिकारी बताते हैं।

फोन/वीडियो कॉल पर कहते हैं कि आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या टेरर फंडिंग केस में आया है।

“डिजिटल अरेस्ट” का नाम देकर वीडियो कॉल पर रखते हैं, फर्जी वॉरंट/कोर्ट ऑर्डर दिखाते हैं।

पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं – “सिक्योरिटी डिपॉजिट”, “बेल” या “इन्वेस्टिगेशन” के नाम पर।

लाखों-करोड़ों की ठगी हो रही है, खासकर बुजुर्ग और कम जागरूक लोग शिकार बनते हैं।

सरकार के नए निर्देश WhatsApp को क्या हैं?

संदिग्ध डिवाइस IDs (IMEI या यूनिक डिवाइस आइडेंटिफायर) को ब्लॉक करना।

स्कैम में इस्तेमाल होने वाले हानिकारक APK फाइल्स को डिटेक्ट और ब्लॉक करने की टेक्नोलॉजी मजबूत करना।

Skype जैसी सेफ्टी फीचर्स जोड़ना (जैसे स्कैम डिटेक्शन, AI कंटेंट चेक)।

डिलीट हुए अकाउंट्स का यूजर डेटा 180 दिनों तक रखना (IT Rules 2021 के तहत) ताकि जांच में मदद मिले।

45 दिनों में डिवाइस ID ब्लॉकिंग के लिए अलग प्रपोजल जमा करना।

पहले भी सरकार ने हजारों WhatsApp अकाउंट्स और Skype IDs ब्लॉक किए हैं (2025 में 83,000+ WhatsApp अकाउंट्स ब्लॉक), लेकिन अब फोकस डिवाइस लेवल पर है – ताकि स्कैमर्स बार-बार नए सिम से काम न कर सकें।

क्या करें अगर आपको डिजिटल अरेस्ट कॉल आए?

घबराएं नहीं – असली पुलिस कभी वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती, न पैसे मांगती है।

कॉल काटें, किसी से शेयर न करें।

तुरंत रिपोर्ट करें: cybercrime.gov.in पर या हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

बैंक को बताएं अगर पैसे ट्रांसफर हो गए – अकाउंट फ्रीज करवाएं।

संदिग्ध नंबर ब्लॉक करें और 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें।

यह कदम साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा है, लेकिन यूजर्स को भी जागरूक रहना होगा।

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