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HRA से गिफ्ट तक… 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स में 7 बड़े बदलाव! सैलरीड क्लास के लिए क्या मतलब?

HRA से गिफ्ट तक… 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स में 7 बड़े बदलाव! सैलरीड क्लास के लिए क्या मतलब?

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया है। ये नियम नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, जो 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेंगे। मुख्य मकसद: टैक्स सिस्टम को सरल बनाना, भाषा आसान करना, अनुपालन आसान करना और कुछ छूट बढ़ाना। ITR फाइलिंग, सैलरी परक्विजिट्स (भत्ते), HRA, गिफ्ट्स आदि में बड़े बदलाव आ रहे हैं।

यहां 7 सबसे बड़े और आम लोगों पर असर डालने वाले बदलाव हैं (ज्यादातर पुराने टैक्स रिजीम के तहत, जहां छूट ज्यादा मिलती है):

HRA छूट में बड़ा विस्तार – 4 नए शहर शामिल

अब 50% HRA छूट (सैलरी का 50% तक टैक्स-फ्री) वाले शहरों की लिस्ट बढ़कर 8 हो गई है: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई के अलावा अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद भी शामिल।

बाकी शहरों में 40% छूट बरकरार।

नया नियम: HRA क्लेम करने के लिए मकान मालिक से रिश्ता (रिलेशन) बताना अनिवार्य होगा (जैसे रिश्तेदार नहीं तो PAN डिटेल्स)। नए फॉर्म 124 (पुराना Form 12BB की जगह) में ये डिस्क्लोज करना होगा। इससे फर्जी क्लेम रोकने में मदद मिलेगी।

गिफ्ट और वाउचर की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ी

कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट, वाउचर, कूपन या टोकन अब सालभर में ₹15,000 तक टैक्स-फ्री (पुराना लिमिट ₹5,000 था)।

₹15,000 से ज्यादा होने पर पूरी राशि टैक्सेबल हो जाएगी। त्योहारों/जन्मदिन पर मिलने वाले गिफ्ट्स के लिए अच्छी राहत!

फ्री मील/खाने की छूट बढ़ी

ऑफिस में फ्री मील या मील कार्ड पर अब ₹200 प्रति मील तक टैक्स-फ्री (पुराना ₹50 था)।

नॉन-अल्कोहलिक बेवरेज भी शामिल। महंगाई को देखते हुए बड़ी राहत।

बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल अलाउंस में भारी बढ़ोतरी

बच्चों की एजुकेशन अलाउंस: ₹100/महीना से बढ़कर ₹3,000/महीना प्रति बच्चा (सालाना ₹36,000 तक)।

हॉस्टल एक्सपेंस अलाउंस: ₹300/महीना से बढ़कर ₹9,000/महीना प्रति बच्चा (सालाना ₹1,08,000 तक)।

अधिकतम 2 बच्चों पर लागू। स्कूल/हॉस्टल खर्च वाले पैरेंट्स के लिए बड़ा फायदा!

कंपनी कार और घर (परक्विजिट्स) के वैल्यूएशन में बदलाव

कंपनी से मिलने वाली कार या घर की टैक्सेबल वैल्यू में अपडेट।

उदाहरण: छोटी कार (<1.6L इंजन) के लिए परक्विजिट वैल्यू बढ़ी, लेकिन कुछ केस में ज्यादा रियलिस्टिक।

कंपनी द्वारा किराए पर लिया घर देने पर टैक्सेबल वैल्यू: असल किराया या सैलरी का 10% (जो कम हो)।

टैक्स ईयर का नया कॉन्सेप्ट और ITR डेडलाइन में बदलाव

अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ होगा (1 अप्रैल से 31 मार्च)।

ITR डेडलाइन: सैलरीड/सिंपल केस में 31 जुलाई, बिजनेस वाले में 31 अगस्त, ऑडिट वाले में 31 अक्टूबर। रिवाइज्ड रिटर्न की डेडलाइन भी बढ़ी।

अन्य छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव

TCS दरों में कटौती (जैसे LRS एजुकेशन/मेडिकल पर 5% से 2%)।

PF/रिटायरमेंट फंड में कुछ लिमिट्स (जैसे एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन ₹7.5 लाख से ज्यादा पर टैक्स)।

डिजिटल और सरल फॉर्म्स, कम पेपरवर्क, लेकिन डिस्क्लोजर ज्यादा सख्त।

कुल मिलाकर असर:

सैलरीड क्लास (खासकर मेट्रो/टेक सिटी में रहने वाले) को HRA, गिफ्ट, मील, बच्चों की पढ़ाई में ज्यादा छूट मिलेगी। लेकिन डॉक्यूमेंटेशन (जैसे लैंडलॉर्ड रिलेशन) सख्त होगा। पुराना रिजीम चुनने वालों को ज्यादा फायदा, नए रिजीम में छूट कम लेकिन रेट्स लो।

अगर आप सैलरीड हैं तो HR से बात करें या CA से कंसल्ट करें – 1 अप्रैल से ये लागू हो जाएंगे।

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