Thursday, September 10, 2026
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बदरी-केदार धाम: रावल परंपरा और वर्तमान विवादों का पूरा घटनाक्रम

बदरी-केदार धाम: रावल परंपरा और वर्तमान विवादों का पूरा घटनाक्रम

आदि गुरु शंकराचार्य ने देश को धार्मिक सूत्र में पिरोने के लिए चारों कोनों में पीठों की स्थापना के साथ ही उत्तराखंड के बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में दक्षिण भारतीय ब्राह्मणों की ‘रावल पद्धति’ लागू की थी। वर्तमान में इन दोनों धामों के मुख्य पुजारियों (रावल) को लेकर अलग-अलग विवाद सामने आ रहे हैं।

बदरीनाथ और केदारनाथ: रावल नियुक्ति की परंपरा

विशिष्टता: बदरीनाथ धाम (विष्णु धाम) | केदारनाथ धाम (शिव धाम)

* मूल स्थान: केरल के नंबूदरी ब्राह्मण। | कर्नाटक/दक्षिण भारत के वीरशैव लिंगायत।

* अनिवार्यता: वैदिक ज्ञान, संस्कृत और आजीवन ब्रह्मचर्य। | धार्मिक दक्षता और शैव विधियों का ज्ञान।

* पूजा पद्धति: रावल स्वयं गर्भगृह में मुख्य पूजा करते हैं। | रावल सीधे शिवलिंग को स्पर्श नहीं करते; स्थानीय पुजारी पूजा करते हैं।

* शीतकालीन प्रवास: जोशीमठ स्थित नरसिंह मंदिर में पूजा। | ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा।

केदारनाथ धाम: उत्तराधिकारी चयन पर विवाद

केदारनाथ में विवाद तब शुरू हुआ जब निवर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा नांदेड़ में पट्टाभिषेक कर अपना उत्तराधिकारी घोषित करने की सूचना मिली।

* बीकेटीसी का पक्ष: बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, रावल नियुक्ति के लिए समिति ही अधिकृत है। अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव समिति को नहीं मिला है, इसलिए रावल भीमाशंकर को नोटिस भेजा गया है।

बदरीनाथ धाम: पूर्व रावल के विवाह पर छिड़ी बहस

बदरीनाथ के एक पूर्व रावल का विवाह का वीडियो सामने आने के बाद ‘ब्रह्मचर्य’ के नियमों पर सवाल उठ रहे हैं:

* विरोध: धर्माधिकारी जगदंबा प्रसाद सती और डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी का कहना है कि 1939 के एक्ट के अनुसार रावल के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य (Celibacy) अनिवार्य है, चाहे वे पद पर रहें या त्यागपत्र दे दें।

* बचाव: बीकेटीसी अध्यक्ष और पूर्व रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी का तर्क है कि ब्रह्मचर्य केवल पद पर रहने तक अनिवार्य है। पदमुक्त होने के बाद यह उनका निजी जीवन है।

चारधाम यात्रा 2026 से पहले प्रशासनिक फेरबदल

यात्रा शुरू होने से ठीक पहले प्रशासन में भी बड़ी हलचल हुई है। 17 मार्च 2026 को बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विजय थपलियाल की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हें मूल विभाग भेज दिया गया है। फिलहाल नए सीईओ की नियुक्ति को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

 

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