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काबुल अस्पताल हमला: अफगान क्रिकेटर्स ने घायलों से की मुलाकात; पाकिस्तान के ‘हवाई हमले’ के खिलाफ खिलाड़ियों का फूटा गुस्सा

काबुल अस्पताल हमला: अफगान क्रिकेटर्स ने घायलों से की मुलाकात; पाकिस्तान के ‘हवाई हमले’ के खिलाफ खिलाड़ियों का फूटा गुस्सा

काबुल: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच काबुल के अस्पतालों में दिल दहला देने वाले दृश्य देखने को मिल रहे हैं। पाकिस्तानी हवाई हमलों में घायल हुए निर्दोष नागरिकों का हालचाल जानने के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) के शीर्ष अधिकारियों और राष्ट्रीय टीम के प्रमुख खिलाड़ियों ने राजधानी के विभिन्न अस्पतालों का दौरा किया।

मैदान के नायकों ने पीड़ितों को दिया ढांढस

अफगानिस्तान के वनडे और टेस्ट कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने अपनी टीम के साथियों गुलबदीन नायब और कैस अहमद के साथ ‘वज़ीर अकबर खान’ अस्पताल और ‘काबुल इमरजेंसी’ अस्पताल का दौरा किया।

* एकजुटता का संदेश: खिलाड़ियों ने हमले में बचे लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की।

* भावुक क्षण: कैप्टन शाहिदी ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा क्रिकेट समुदाय इस दुख की घड़ी में अपने देशवासियों के साथ खड़ा है। खिलाड़ियों ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने के लिए सामूहिक प्रार्थना भी की।

क्रिकेट जगत में भारी आक्रोश

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अफगानिस्तान के क्रिकेट सितारों के बीच पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को लेकर जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है। काबुल में हुए इन हवाई हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने की खबरों ने खिलाड़ियों को झकझोर कर रख दिया है।

* जवाबदेही की मांग: कई सीनियर खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया के जरिए इस हिंसा की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि अस्पतालों और रिहायशी इलाकों पर बमबारी करना मानवता के खिलाफ अपराध है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

* बढ़ता तनाव: खेल जगत के जानकारों का मानना है कि इन घटनाओं का असर भविष्य में दोनों देशों के बीच होने वाले क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ सकता है।

मानवीय संकट गहराया

काबुल से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों के बाद अस्पतालों में चिकित्सा संसाधनों की कमी देखी जा रही है। अफगान क्रिकेटरों की इस पहल को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है, क्योंकि यह न केवल पीड़ितों का मनोबल बढ़ा रही है, बल्कि दुनिया का ध्यान इस मानवीय संकट की ओर भी खींच रही है।

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