सड़क दुर्घटना और क्वाड्रिप्लेजिया: क्यों कभी ठीक नहीं हो पाए हरीश राणा? तेज रफ्तार शौकीनों के लिए बड़ी चेतावनी
सड़क दुर्घटना और क्वाड्रिप्लेजिया: क्यों कभी ठीक नहीं हो पाए हरीश राणा? तेज रफ्तार शौकीनों के लिए बड़ी चेतावनी
तेज रफ्तार और एड्रेनालिन रश का शौक कभी-कभी जीवनभर का पछतावा बन जाता है। हरीश राणा का मामला इसका सबसे दुखद उदाहरण है। एक भीषण सड़क दुर्घटना के बाद वे जिस ‘क्वाड्रिप्लेजिया’ स्थिति का शिकार हुए, उसने उन्हें ताउम्र के लिए बिस्तर पर ला दिया। तमाम आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बावजूद वे पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए।
क्या है ‘क्वाड्रिप्लेजिया’ (Quadriplegia) कंडीशन?
चिकित्सा की भाषा में इसे ‘टेट्राप्लेजिया’ भी कहा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) में गंभीर चोट लगने के कारण होने वाली स्थिति है।
* चारों अंगों का लकवा: इसमें गर्दन के नीचे का पूरा हिस्सा सुन्न हो जाता है। व्यक्ति अपने दोनों हाथ और दोनों पैर हिलाने की शक्ति खो देता है।
* अंगों पर नियंत्रण खत्म: न केवल हाथ-पैर, बल्कि धड़ (Torso) और पेट की मांसपेशियों पर भी नियंत्रण नहीं रहता।
* रीढ़ का ऊपरी हिस्सा प्रभावित: यह स्थिति तब बनती है जब चोट रीढ़ की हड्डी के सर्वाइकल हिस्से (Cervical vertebrae – C1 से C7) में लगती है।
हरीश राणा क्यों ठीक नहीं हो पाए?
रीढ़ की हड्डी शरीर का वह ‘हाइवे’ है जो दिमाग से संकेतों को अंगों तक पहुँचाता है। हरीश के मामले में यह हाइवे पूरी तरह टूट गया था:
* नर्व डैमेज (Nerve Damage): रीढ़ की हड्डी की नसें एक बार पूरी तरह कट या दब जाएं, तो उन्हें फिर से जोड़ना या विकसित करना वर्तमान चिकित्सा विज्ञान में लगभग असंभव है।
* सिग्नल का कटना: उनके दिमाग से हाथ-पैर हिलाने के संकेत रीढ़ की चोट वाली जगह से आगे नहीं बढ़ पाते थे।
* सेकेंडरी कॉम्प्लिकेशंस: लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण शरीर में बेडसोर्स, श्वसन संबंधी समस्याएं और मांसपेशियों का सिकुड़ना (Atrophy) शुरू हो गया, जिसने रिकवरी की उम्मीदें खत्म कर दीं।
तेज स्पीड वालों के लिए क्यों है यह ‘साइलेंट किलर’?
जब कोई वाहन 80-100 किमी/घंटा की रफ्तार पर होता है और अचानक टकराता है, तो शरीर का ऊपरी हिस्सा (गर्दन) एक जबरदस्त ‘झटके’ (Whiplash) का अनुभव करता है।
* सीट बेल्ट के बावजूद खतरा: कई बार एयरबैग और सीट बेल्ट छाती को तो बचा लेते हैं, लेकिन गर्दन पर लगने वाला तेज झटका सर्वाइकल स्पाइन को तोड़ देता है।
* एक सेकंड की गलती: रीढ़ की हड्डी में लगा मात्र 1 मिलीमीटर का गहरा कट भी व्यक्ति को जीवनभर के लिए व्हीलचेयर या बिस्तर पर ला सकता है।
डॉक्टरों की सलाह: “क्वाड्रिप्लेजिया का कोई परमानेंट इलाज नहीं है, केवल फिजियोथेरेपी से स्थिति को थोड़ा मैनेज किया जा सकता है। बचाव ही एकमात्र रास्ता है।”
सुरक्षा के नियम जो जान बचा सकते हैं:
* हमेशा ISI मार्क वाला हेलमेट पहनें (बाइक के लिए)।
* कार में गर्दन को सपोर्ट देने वाला Headrest सही ऊंचाई पर रखें।
* स्पीड लिमिट का पालन करें, क्योंकि हड्डियां लोहे की नहीं बनी होतीं।
