राजनीति

I-PAC Raid Case: “मुख्यमंत्री का इस तरह घुसना दुखद”, सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के रुख पर जताई कड़ी आपत्ति

I-PAC Raid Case: “मुख्यमंत्री का इस तरह घुसना दुखद”, सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के रुख पर जताई कड़ी आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार को आई-पैक (I-PAC) कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप के लिए कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री के छापेमारी स्थल पर पहुंचने और कार्यवाही में बाधा डालने को एक “असामान्य और दुखद स्थिति” (Unhappy Situation) करार दिया।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने बंगाल सरकार की दलीलों पर सवाल उठाते हुए कहा:

* “क्या ED सिर्फ देखती रहे?”: कोर्ट ने पूछा कि जब राज्य की मुख्यमंत्री खुद छापेमारी में दखल दें, तो क्या केंद्रीय एजेंसी सिर्फ ‘मूकदर्शक’ बनी रहे? क्या उनके पास अदालत आने का अधिकार नहीं है?

* “यह पहले कभी नहीं हुआ”: बेंच ने कहा कि एक मुख्यमंत्री का जांच एजेंसी के काम में इस तरह बाधा डालना एक गलत उदाहरण पेश करता है। अगर दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री भी ऐसा करने लगे, तो देश में कानून व्यवस्था की स्थिति क्या होगी?

* “कानून में शून्य नहीं हो सकता”: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में कानूनी उपचार का अभाव नहीं हो सकता। यदि कोई एजेंसी बाधित होती है, तो उसे अदालत से गुहार लगाने का पूरा हक है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला जनवरी 2026 की शुरुआत का है, जब ED की टीम कोलकाता में टीएमसी (TMC) की चुनावी रणनीतिकार कंपनी I-PAC के दफ्तर और उसके निदेशक के आवास पर छापेमारी कर रही थी।

* ED का आरोप: एजेंसी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी पुलिस बल के साथ जबरन छापेमारी स्थल के अंदर घुस आईं और अधिकारियों को धमकाया। साथ ही, कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज और डिवाइस भी जब्त करने से रोक दिए गए।

* ममता बनर्जी का पक्ष: बंगाल सरकार और उनके वकीलों (कपिल सिब्बल और श्याम दीवान) ने दलील दी कि ED एक सरकारी विभाग है, कोई स्वतंत्र व्यक्ति नहीं, इसलिए वह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के नाम पर सीधे सुप्रीम कोर्ट (अनुच्छेद 32 के तहत) नहीं आ सकती।

अगली सुनवाई और निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को “गंभीर न्यायिक जांच” के योग्य माना है। कोर्ट ने पहले ही बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है और छापेमारी स्थल के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी।

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