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होरमुज संकट: जहां दुनिया फंसी, वहां से सुरक्षित निकले भारतीय जहाज; जयशंकर बोले- “बातचीत से निकले नतीजे”

ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच मचे वैश्विक हाहाकार के दौरान भारत ने अपनी कूटनीति का लोहा मनवाया है। जहां दुनिया भर के जहाज ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में फंसे हुए हैं, वहीं भारत के दो जहाज सुरक्षित बाहर निकल आए हैं।

होरमुज संकट: जहां दुनिया फंसी, वहां से सुरक्षित निकले भारतीय जहाज; जयशंकर बोले- “बातचीत से निकले नतीजे”

मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा मार्ग ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ इस समय दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बन चुका है। ईरान द्वारा इस मार्ग को ‘चोक’ (बंद) करने के बाद जहां वैश्विक आपूर्ति ठप है, वहीं भारतीय ध्वज वाले दो टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ इसे सुरक्षित पार करने में सफल रहे हैं।

कैसे मिली भारतीय जहाजों को राह?

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि यह किसी “व्यापक समझौते” का परिणाम नहीं है, बल्कि निरंतर जारी कूटनीतिक संवाद का फल है।

* कोई ‘लेन-देन’ नहीं: जयशंकर ने इन खबरों को खारिज कर दिया कि भारत ने इसके बदले ईरान को कुछ दिया है। उन्होंने कहा, “यह आदान-प्रदान का मुद्दा नहीं है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंध हैं, जिसके आधार पर मैंने यह बातचीत शुरू की।”

* घटना दर घटना संवाद: विदेश मंत्री ने बताया कि हर जहाज की आवाजाही एक अलग घटना है और इसके लिए हर बार समन्वय (Coordination) स्थापित करना पड़ता है।

* पीएम मोदी की पहल: इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से फोन पर बात कर ऊर्जा पारगमन (Transit) और वस्तुओं की आपूर्ति पर चर्चा की थी, जिसने इस कूटनीतिक सफलता की जमीन तैयार की।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है यह रास्ता?

होरमुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता है। भारत के लिए इसकी अहमियत इन आंकड़ों से समझी जा सकती है:

* ऊर्जा सुरक्षा: भारत दुनिया में एलपीजी (LPG) का दूसरा और प्राकृतिक गैस (LNG) का चौथा सबसे बड़ा खरीदार है। हमारी गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।

* खतरे में उद्योग: गैस की कमी के कारण देश में सिरेमिक टाइल जैसे उद्योग ठप होने की कगार पर हैं। सरकार ने फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर घरों और परिवहन क्षेत्र को गैस आपूर्ति के आदेश दिए हैं।

* महत्वपूर्ण खेप: सुरक्षित निकले जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ लगभग 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं, जो जल्द ही मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचेंगे।

“अभी तो शुरुआत है”

डॉ. जयशंकर ने सावधानी बरतते हुए कहा कि यह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “अभी तो शुरुआत ही है। हमारे कई और जहाज वहां फंसे हैं, इसलिए बातचीत की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।”

वैश्विक प्रभाव

दुनिया के कुल कच्चे तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा इसे बंद किए जाने से चीन और भारत जैसे बड़े एशियाई बाजारों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। ऐसे में भारत का अपने जहाजों को सुरक्षित निकालना उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

 

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