राजनीति

बिहार राज्यसभा चुनाव: NDA का ‘क्लीन स्वीप’, सभी 5 सीटों पर मिली जीत; महागठबंधन में बड़ी सेंधमारी

बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में एनडीए (NDA) के दबदबे को एक बार फिर साबित कर दिया है। आंकड़ों के खेल और महागठबंधन में हुई बड़ी टूट के कारण एनडीए ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया है।

बिहार राज्यसभा चुनाव: NDA का ‘क्लीन स्वीप’, सभी 5 सीटों पर मिली जीत; महागठबंधन में बड़ी सेंधमारी

पटना: बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए हुए हाई-वोल्टेज चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए के रणनीतिक कौशल के आगे महागठबंधन पूरी तरह पस्त नजर आया। एनडीए ने अपने सभी 5 उम्मीदवारों को जीत दिलाकर विधानसभा के बाद अब उच्च सदन में भी अपनी ताकत का लोहा मनवाया है।

NDA के विजेता उम्मीदवार

एनडीए की ओर से मैदान में उतरे ये सभी पांचों दिग्गज अब राज्यसभा जाएंगे:

* नीतीश कुमार (जदयू प्रमुख एवं मुख्यमंत्री)

* नितिन नवीन (भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष)

* राम नाथ ठाकुर (केंद्रीय मंत्री, जदयू)

* उपेंद्र कुशवाहा (RLM प्रमुख)

* शिवेश कुमार (भाजपा)

वोटिंग का गणित: महागठबंधन के ‘किले’ में सेंध

बिहार विधानसभा की 243 सीटों के गणित के हिसाब से एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 वोटों की आवश्यकता थी।

* NDA की ताकत: एनडीए के पास अपने 202 विधायकों का मजबूत समर्थन रहा। 4 सीटों पर जीत के लिए 164 वोट खर्च करने के बाद भी एनडीए के पास 38 वोट बचे थे। पांचवीं सीट के लिए उन्हें मात्र 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, जो उन्होंने आसानी से हासिल कर लिए।

* महागठबंधन की विफलता: महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक होने का दावा था, लेकिन वोटिंग के समय केवल 37 विधायकों ने ही मतदान किया (जिसमें कुछ एनडीए की ओर से आए वोट भी शामिल हो सकते हैं)।

महागठबंधन के ‘लापता’ विधायक: हार की बड़ी वजह

चुनाव के दौरान विपक्ष की एकता उस समय तार-तार हो गई जब उनके महत्वपूर्ण विधायक वोटिंग के लिए ही नहीं पहुंचे।

* कांग्रेस के बागी: मनोज विश्वास, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोहर प्रसाद सिंह वोटिंग से नदारद रहे।

* RJD को झटका: राजद विधायक फैसल रहमान ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

इन चार विधायकों की अनुपस्थिति ने महागठबंधन की पांचवीं सीट जीतने की रही-सही उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।

निष्कर्ष: पांचवीं सीट का दिलचस्प मुकाबला

असली लड़ाई पांचवीं सीट के लिए थी, क्योंकि 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में थे। संख्याबल के आधार पर एनडीए ने न केवल अपनी एकजुटता दिखाई, बल्कि विपक्षी खेमे में लगी सेंध का फायदा उठाते हुए पांचवीं सीट पर भी कब्जा जमा लिया।

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