अटल टनल में कुदरत का कहर: भारी बर्फबारी के बीच फंसे हज़ारों वाहन; रात भर चला पुलिस का ‘महा-रेस्क्यू’ ऑपरेशन
अटल टनल में कुदरत का कहर: भारी बर्फबारी के बीच फंसे हज़ारों वाहन; रात भर चला पुलिस का ‘महा-रेस्क्यू’ ऑपरेशन
हिमाचल प्रदेश के रोहतांग और अटल टनल क्षेत्र में अचानक हुए मौसम परिवर्तन ने सैकड़ों पर्यटकों की जान जोखिम में डाल दी। सोमवार, 16 मार्च 2026 की रात अटल टनल के साउथ पोर्टल पर हुई भारी बर्फबारी के कारण लगभग 1000 से अधिक वाहन बीच रास्ते में फंस गए। शून्य से नीचे गिरते तापमान के बीच प्रशासन और मनाली पुलिस ने रात भर मोर्चा संभालकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
चुनौतीपूर्ण रात: डीएसपी मनाली ने खुद संभाली कमान
बर्फबारी इतनी अचानक और तेज थी कि लाहौल से मनाली की ओर आ रहे वाहनों के पहिये जाम हो गए। हालात की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मनाली केडी शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर डटे रहे।
* साउथ पोर्टल पर घेराबंदी: सबसे ज्यादा असर टनल के दक्षिणी छोर (South Portal) पर देखा गया, जहाँ सड़क पर कई इंच बर्फ जमा हो गई।
* अटल टनल के भीतर फंसे वाहन: ताजा अपडेट के अनुसार, टनल के अंदर अभी भी सैकड़ों गाड़ियां कतार में हैं। ये सभी सैलानी कल लाहौल घाटी से मनाली लौट रहे थे, लेकिन रास्ते बंद होने से बीच में ही फंस गए।
बर्फ पिघलाने के लिए ‘यूरिया’ और ‘मिट्टी’ का सहारा
प्रशासन ने BRO (सीमा सड़क संगठन) की मदद से आधुनिक मशीनों को काम पर लगाया है। सड़क को दोबारा चालू करने के लिए अनोखे तरीके अपनाए जा रहे हैं:
* मिट्टी का छिड़काव: टनल के पास अत्यधिक फिसलन को कम करने के लिए बर्फ पर मिट्टी डाली जा रही है।
* यूरिया खाद का उपयोग: जमी हुई सख्त बर्फ को तेजी से पिघलाने के लिए प्रशासन यूरिया खाद का इस्तेमाल कर रहा है ताकि वाहनों के लिए रास्ता साफ हो सके।
* भारी मशीनरी: बीआरओ के स्नो कटर और डोजर लगातार सड़क की सफाई में जुटे हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी: एसडीएम और डीएसपी मौके पर तैनात
एसडीएम मनाली रमण कुमार शर्मा और पुलिस प्रशासन रात से ही घटना स्थल पर मौजूद हैं। पुलिस का प्राथमिक लक्ष्य सभी पर्यटकों को सुरक्षित मनाली पहुंचाना है। फिलहाल मनाली और केलांग के बीच सड़क मार्ग पूरी तरह बंद है और किसी भी नए वाहन को टनल की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
चेतावनी: मनाली प्रशासन ने पर्यटकों को हिदायत दी है कि जब तक सड़क पूरी तरह साफ नहीं हो जाती और मौसम स्थिर नहीं होता, तब तक वे सोलंग नाला से आगे न बढ़ें।
