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US-Iran War: चाबहार के पास सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी; भारत की चिंताएं बढ़ीं

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक भीषण युद्ध का रूप ले चुका है। ताजा घटनाक्रम में, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र (Chabahar Free Trade Zone) के पास स्थित सैन्य ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए हैं।

US-Iran War: चाबहार के पास सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी बमबारी; भारत की चिंताएं बढ़ीं

चाबहार/वॉशिंगटन: खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करते ही अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। सोमवार, 16 मार्च 2026 को मिली रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी जेट विमानों ने चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के ठीक पीछे स्थित पहाड़ी इलाकों में बने ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

हमले का मुख्य केंद्र और तीव्रता

* पहाड़ी ठिकाने: ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ की फारसी सेवा और ‘अल जजीरा’ के अनुसार, हमले चाबहार शहर के पीछे स्थित उन पहाड़ियों पर किए गए जहाँ ईरान के महत्वपूर्ण रक्षा ढांचे और मिसाइल यूनिट्स मौजूद हैं।

* भीषण विस्फोट: स्थानीय चश्मदीदों ने बताया कि क्षेत्र में कई शक्तिशाली धमाके सुने गए, जिससे मुक्त व्यापार क्षेत्र के आसपास की इमारतों में कंपन महसूस किया गया।

* रणनीतिक महत्व: सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार न केवल ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है, बल्कि यह पाकिस्तान की सीमा के करीब होने के कारण सैन्य दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है।

भारत के लिए क्या है स्थिति?

चाबहार में भारत का बड़ा निवेश है, विशेष रूप से शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल में। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार:

* बंदरगाह सुरक्षित: राहत की बात यह है कि अभी तक के हमलों में भारत द्वारा संचालित बंदरगाह टर्मिनल (IPGL) को निशाना नहीं बनाया गया है।

* व्यापार पर संकट: हालांकि बंदरगाह सुरक्षित है, लेकिन इसके ठीक बगल में स्थित ‘फ्री ट्रेड ज़ोन’ के पास हमले होने से भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुँचने वाला यह व्यापारिक मार्ग पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।

* राजनयिक दबाव: भारत सरकार इस स्थिति पर करीब से नजर रख रही है, क्योंकि चाबहार भारत की ‘कनेक्टिविटी’ रणनीति का मुख्य स्तंभ है।

युद्ध की वर्तमान स्थिति (मार्च 2026)

यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर कई ठिकानों पर सरप्राइज एयरस्ट्राइक की थी।

* नेतृत्व का संकट: रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु के बाद से ईरान में अस्थिरता है। अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई कमान संभाल रहे हैं।

* होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने जवाबी कार्रवाई में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होरमुज’ को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 40% तक का उछाल आया है।

* खारग द्वीप पर हमला: इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मुख्य तेल हब ‘खारग द्वीप’ (Kharg Island) के सैन्य ठिकानों को भी पूरी तरह तबाह करने का दावा किया था।

वैश्विक प्रभाव

पेंटागन का दावा है कि अब तक ईरान के भीतर 15,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया जा चुका है। इस युद्ध ने न केवल खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि भारत, चीन और यूरोप के लिए ऊर्जा संकट भी पैदा कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने अन्य देशों से भी अपील की है कि वे होरमुज जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत भेजें ताकि तेल की आपूर्ति बहाल की जा सके।

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